नागालैंड की प्रख्यात लेखिका ईस्टरीन कीर को उनके अंग्रेजी उपन्यास स्पिरिट नाइट्स के लिए 2024 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया है। साहित्य अकादमी ने हाल ही में 21 भारतीय भाषाओं में अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें कीर की यह उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। साइमन एंड शूस्टर इंडिया द्वारा प्रकाशित स्पिरिट नाइट्स चांग नागा जनजाति की एक भयावह और गहन कहानी को प्रस्तुत करता है, जो नागालैंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई को उजागर करता है।
पुरस्कार श्रेणियाँ और अन्य विजेता
साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय साहित्य में विभिन्न भाषाओं की उत्कृष्ट कृतियों को सम्मानित करता है। अंग्रेजी श्रेणी में ईस्टरीन कीर की जीत उनके साहित्यिक योगदान को रेखांकित करती है। उत्तर-पूर्व भारत के अन्य विजेताओं में असमिया लेखक समीर तांती को उनके कार्य फ़ारिंगबोर बटोर कथा जेन के लिए, हाओबम सत्यबती देवी को मणिपुरी कविता संग्रह मैनु बोरा नुंग्शी शेरोल के लिए, और एरोन राजा को बोडो उपन्यास स्वर्णि थाखाई के लिए सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार क्षेत्रीय साहित्य की विविधता और समृद्धि को दर्शाते हैं।
पुरस्कार का स्वरूप और समारोह
साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेताओं को एक उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका, एक शॉल और एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह वित्तीय सहायता लेखकों को उनकी साहित्यिक यात्रा को और समृद्ध करने में मदद करती है। पुरस्कार वितरण समारोह 8 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें इन साहित्यिक प्रतिभाओं की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाएगा।
साहित्य अकादमी पुरस्कार का महत्व
साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय साहित्य में एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो विभिन्न भाषाओं में साहित्यिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करता है। यह पुरस्कार लेखकों को क्षेत्रीय और सांस्कृतिक कथाओं को राष्ट्रीय मंच पर लाने का अवसर प्रदान करता है। यह विविधता को बढ़ावा देता है और भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपराओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाता है।
ईस्टरीन कीर का साहित्यिक योगदान
ईस्टरीन कीर की रचनाएँ नागालैंड की चांग नागा जनजाति की संस्कृति, परंपराओं और लोककथाओं को जीवंत करती हैं। उनकी कहानी कहने की शैली सरल लेकिन गहरी है, जो पाठकों को नागा जीवन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराइयों से जोड़ती है। स्पिरिट नाइट्स उनकी लोककथाओं से प्रेरित एक कृति है, जो चांग नागा जनजाति की समृद्ध विरासत को दर्शाती है। कीर की लेखनी उत्तर-पूर्व के उभरते लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और समकालीन भारतीय साहित्य में उनकी आवाज़ एक अनूठा स्थान रखती है।
चांग नागा जनजाति, जो नागालैंड में निवास करती है, अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जानी जाती है। कीर की रचनाएँ इन परंपराओं को सहेजते हुए उन्हें वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं, जिससे भारतीय साहित्य में उत्तर-पूर्व की उपस्थिति और मजबूत होती है।
यह पुरस्कार न केवल ईस्टरीन कीर की साहित्यिक प्रतिभा का सम्मान है, बल्कि नागालैंड और उत्तर-पूर्व के सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण कदम भी है।