शेर और नन्ही चिड़िया
एक घने जंगल में शेर राजा रहता था। सभी जानवर उससे डरते थे। लेकिन उसी जंगल में एक नन्ही-सी चिड़िया भी रहती थी। वह बहुत खुशमिज़ाज थी और हर सुबह मीठे गीत गाकर पूरे जंगल को जगा देती थी।
एक दिन तेज़ आँधी आई। चिड़िया का छोटा-सा घोंसला टूटकर ज़मीन पर गिर गया। उसके अंडे भी खतरे में थे।
चिड़िया रोने लगी। जंगल के बड़े-बड़े जानवर उसे देखकर आगे बढ़ गए। किसी ने मदद नहीं की।
उसी समय शेर राजा वहाँ पहुँचा। उसने चिड़िया को उदास देखा और पूछा, “क्या हुआ?”
चिड़िया ने सारी बात बता दी।
शेर ने बिना देर किए अपनी मज़बूत टहनियों जैसी पूँछ और पंजों की मदद से बड़े पेड़ की मजबूत डाल तक सूखी टहनियाँ पहुँचाईं। बंदरों ने पत्ते लाए, हाथी ने पानी छिड़ककर घोंसले को मजबूत किया और गिलहरियों ने घास इकट्ठी की।
कुछ ही देर में चिड़िया का नया घोंसला तैयार हो गया।
चिड़िया खुशी से गाने लगी। पूरा जंगल उसकी मीठी आवाज़ से गूँज उठा।
शेर मुस्कुराया और बोला, “ताकत का असली मतलब किसी को डराना नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उसकी मदद करना है।”
उस दिन के बाद जंगल के सभी जानवर एक-दूसरे की मदद करने लगे। अब वहाँ डर से ज़्यादा दोस्ती का राज था।
सच्ची ताकत दूसरों की मदद करने में होती है। दया और सहयोग से हर मुश्किल आसान बन जाती है।




