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अदालत के भीतर सन्नाटा ऐसा था कि घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनी जा सकती थी। व्हीलचेयर पर बैठा आधा जला हुआ अमित मेहरा और उसके पीछे खड़ी पुलिस इंस्पेक्टर रोहन की वो कुटिल मुस्कान कबीर की आंखों में चुभ रही थी। कबीर का दिमाग तेजी से दौड़ रहा था। मीरा ने अभी-अभी बुदबुदाकर जो कहा था, उसने कबीर के पैरों तले की जमीन खिसका दी थी—“रोहन इस पूरी साज़िश का मास्टरमाइंड है।”
कबीर ने गहरी सांस ली। एक तरफ उसका बचपन का दोस्त था और दूसरी तरफ उसका प्यार। लेकिन कबीर ने भावनाओं के बजाय सच का साथ देने का फैसला किया। उसने चुपके से अपने वकील, एडवोकेट डिसूजा के कान में कुछ कहा।
द क्रॉस-एग्जामिनेशन: कबीर का पलटवार
एडवोकेट डिसूजा ने मुस्कुराते हुए अदालत से कहा,
“माय लॉर्ड! अमित मेहरा का ज़िंदा लौट आना वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन यह अदालत हवा में नहीं, सबूतों पर चलती है। मैं इंस्पेक्टर रोहन से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ, जो इस केस के इंचार्ज भी हैं।”
जज ने अनुमति दे दी। रोहन आत्मविश्वास के साथ गवाह बॉक्स में आकर खड़ा हो गया। उसे लगा कि बाज़ी उसके हाथ में है।
डिसूजा ने पूछा,
“इंस्पेक्टर रोहन, पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमित मेहरा तीन साल से लापता थे और मृत मान लिए गए थे। आपको वो अचानक विदेश के किस अस्पताल में मिले? और उनकी मेडिकल फाइलें कहाँ हैं?”
रोहन ने बिना हिचकिचाए कहा,
“माय लॉर्ड, मुझे अपने गुप्त सूत्रों से पता चला कि अमित जी स्विट्जरलैंड के एक प्राइवेट क्लिनिक में कोमा में थे। जैसे ही मुझे खबर मिली, मैं कानून की मदद के लिए उन्हें यहाँ ले आया।”
“बहुत बढ़िया झूठ, इंस्पेक्टर रोहन!” डिसूजा की आवाज़ कोर्ट रूम में गूंज उठी। “माय लॉर्ड, मैं कोर्ट के सामने अमित मेहरा के असली बैंक स्टेटमेंट्स और रोहन के पर्सनल अकाउंट की डिटेल्स पेश करना चाहता हूँ।”
जैसे ही डिसूजा ने डाक्यूमेंट्स जज को सौंपे, रोहन के माथे पर पसीना आ गया।
सच का पर्दाफाश: क्या था असली खेल?
डिसूजा ने कोर्ट को बताना शुरू किया,
“सच यह है माय लॉर्ड कि तीन साल पहले जब अवनी (मीरा) ने आत्मरक्षा में अमित पर हमला किया था, तो अमित मरा नहीं था, बल्कि गंभीर रूप से घायल हुआ था। लेकिन उस बंगले पर पुलिस की तरफ से सबसे पहले पहुँचने वाला शख्स इंस्पेक्टर रोहन था।”
“रोहन ने देखा कि अमित ज़िंदा है और अवनी डरकर भाग चुकी है। रोहन ने इस मौके का फायदा उठाया। उसने अमित को गायब कर दिया और अवनी के नाम पर अमित की करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़पने की साज़िश रची। पिछले तीन सालों से, अमित मेहरा को किसी अस्पताल में नहीं, बल्कि रोहन ने शिमला के ही एक गुप्त फार्महाउस में कैद करके रखा था और उसकी आधी संपत्ति अपने नाम ट्रांसफर करवा रहा था!”
सरकारी वकील चिल्लाया, “बकवास! इस बात का क्या सबूत है?”
तभी कबीर अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसने अपना फोन जज के सामने पेश किया। “सबूत मैं हूँ माय लॉर्ड! जब मीरा ने मुझे इशारा किया, तो मैंने तुरंत रोहन के उसी सरकारी फार्महाउस पर अपने कुछ आदमियों को भेजा। वहां अमित मेहरा का इलाज करने वाले डॉक्टर को मेरे आदमियों ने पकड़ लिया है और उसने कबूल कर लिया है कि रोहन उसे अमित को ड्रग्स देकर बेहोश रखने के लिए हर महीने लाखों रुपये दे रहा था। यह रहा उस डॉक्टर का रिकॉर्डेड बयान!”
आखिरी ड्रामा और फैसला
खुद को पूरी तरह फंसता देख, रोहन का संयम टूट गया। उसने अचानक अपनी कमर से बंदूक निकाली और कबीर पर तान दी। “हाँ! किया मैंने यह सब! अमित की दौलत पर मेरा हक होना चाहिए था! कबीर, तू बीच में न आता तो आज यह औरत जेल जाती और अमित की बची हुई जायदाद भी मेरी होती!”
“कमरडाउन, रोहन! बंदूक नीचे करो!” कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत रोहन को चारों तरफ से घेर लिया। रोहन समझ गया कि खेल खत्म हो चुका है। उसने बंदूक फेंक दी। पुलिस ने रोहन को हथकड़ी लगा दी।
व्हीलचेयर पर बैठे अमित मेहरा ने रोते हुए अदालत के सामने माना कि उसने अपनी जान बचाने के लिए रोहन का साथ दिया था, क्योंकि रोहन उसे जान से मारने की धमकी दे रहा था। साथ ही, अमित ने यह भी कबूल किया कि तीन साल पहले उसने ही अवनी पर जानलेवा हमला किया था।
जज ने हथौड़ा थपथपाया और अपना अंतिम फैसला सुनाया:
“तमाम सबूतों और बयानों को मददेनज़र रखते हुए, यह अदालत अवनी (मीरा) को अमित मेहरा की हत्या के प्रयास के आरोपों से पूरी तरह बरी करती है, क्योंकि उनका कदम आत्मरक्षा (Self-Defense) में उठाया गया था। वहीं, इंस्पेक्टर रोहन और अमित मेहरा को धोखाधड़ी, साज़िश और कोर्ट को गुमराह करने के जुर्म में 10 साल की बा-मशक्कत कैद की सज़ा सुनाई जाती है।”
हैप्पी एंडिंग (एक नई शुरुआत)
कोर्ट रूम के बाहर, शिमला की ठंडी हवाएं चल रही थीं। मीरा की आँखों से बह रहे आंसू अब थम चुके थे। वह कबीर के सामने आई, उसकी आँखों में कृतज्ञता और असीम प्यार था।
“तुमने एक भगोड़ी के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी कबीर… क्यों?” मीरा ने धीरे से पूछा।
कबीर ने आगे बढ़कर मीरा का हाथ थाम लिया और मुस्कुराते हुए कहा, “क्योंकि डायरी का आखिरी पन्ना मैंने भी पढ़ा था मीरा। तुमने लिखा था न—’अगर मेरा प्यार सच्चा होगा, तो मैं वापस आऊँगी।’ तुम्हारी वापसी का रास्ता साफ करना मेरा फ़र्ज़ था।”
मीरा ने कबीर के सीने पर सिर रख दिया। अतीत के काले बादल हमेशा के लिए छंट चुके थे, और उनकी अधूरी मोहब्बत की डायरी में अब एक खूबसूरत और मुकम्मल नया अध्याय शुरू होने जा रहा था।
— समाप्त —
RealShePower टेकअवे: न्याय की लड़ाई कितनी भी लंबी या मुश्किल क्यों न हो, अगर हौसला सच्चा हो और जीवनसाथी का साथ मजबूत हो, तो हर चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकता है। अपने अधिकारों के लिए लड़ना और सच के साथ खड़े होना ही नारी शक्ति की असली पहचान है।




