👉 अगर आपने इस कहानी का पहला हिस्सा नहीं पढ़ा है, तो ‘द डायरी ऑफ मीरा (भाग-1)’ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
कबीर की गाड़ी शिमला की ढलती शाम को चीरती हुई कोर्ट परिसर की तरफ भाग रही थी। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। रोहन के ज़रिए उसे खबर मिल चुकी थी कि मीरा (अवनी) ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है और अमित मेहरा मर्डर केस की री-ओपनिंग सुनवाई आज ही शाम की स्पेशल कोर्ट में शुरू हो चुकी है।
कबीर जब हांफते हुए कोर्ट रूम के भीतर पहुँचा, तो उसने देखा कि मीरा कटघरे में शांत खड़ी थी। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन चेहरा थका हुआ था। कबीर को देखते ही उसकी आँखों में एक पल के लिए चमक आई, और उसने ना में सिर हिलाया—जैसे वह कह रही हो, “तुम यहाँ क्यों आए कबीर? लौट जाओ।”
पर कबीर पीछे हटने वालों में से नहीं था। उसने शहर के सबसे बड़े क्रिमिनल लॉयर, एडवर्ट डिसूजा को मीरा का केस लड़ने के लिए तैयार कर लिया था।
अदालत की बहस: आत्मरक्षा या साज़िश?
सरकारी वकील ने जजों के सामने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं, “माय लॉर्ड! यह औरत, जिसे आज तक पुलिस ढूंढ रही थी, यह कोई मासूम नहीं है। इसने तीन साल पहले अपने पति अमित मेहरा की बेरहमी से हत्या की और कानून से बचने के लिए नाम बदलकर भाग गई। यह एक सोची-समझी साज़िश थी।”
तभी कबीर के वकील एडवोकेट डिसूजा खड़े हुए,
“आपत्ति माय लॉर्ड! अमित मेहरा एक रसूखदार बिजनेसमैन ज़रूर था, लेकिन बंद दरवाज़ों के पीछे वह एक हैवान था। डोमेस्टिक वायलेंस (घरेलू हिंसा) की मेडिकल रिपोर्ट्स इस बात का सबूत हैं कि अवनी ने जो कुछ भी किया, वह सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए, आत्मरक्षा (Self-Defense) में किया था।”
कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया। जज ने मीरा की तरफ देखा, “अवनी! क्या तुम्हारे पास उस रात का कोई और गवाह या सबूत है जो यह साबित कर सके कि अमित तुम्हें जान से मारने की कोशिश कर रहा था?”
मीरा ने रोते हुए कहा, “नहीं माय लॉर्ड। उस रात उस आलीशान बंगले में हमारे अलावा कोई नहीं था।”
सारे सबूत मीरा के खिलाफ जा रहे थे। जज ने अपना पेन उठाया और कहा, “इस अदालत के पास अवनी की बात को सच मानने का कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए…”
वह एंट्री… जिसने सबको चौंका दिया!
“रुकिए माय लॉर्ड! उस रात उस बंगले में एक और इंसान मौजूद था!”
अचानक कोर्ट रूम का भारी दरवाज़ा खुला और एक व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति ने अंदर एंट्री ली। उस शख्स का आधा चेहरा जला हुआ था और वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर था।
जैसे ही मीरा ने उस शख्स को देखा, उसके चेहरे से खून उतर गया। वह बुरी तरह कांपने लगी और चिल्लाई, “नहीं! यह नहीं हो सकता! तुम… तुम तो मर चुके थे!”
सरकारी वकील और जज भी हैरान थे। वह व्हीलचेयर पर बैठा शख्स कोई और नहीं, बल्कि खुद अमित मेहरा था! जिसे दुनिया तीन साल पहले मरा हुआ मान चुकी थी, जिसके कत्ल के इल्जाम में मीरा आज कटघरे में खड़ी थी, वह ज़िंदा था!
सस्पेंस का नया मोड़: असली खेल तो अब शुरू हुआ है
अमित मेहरा ने अपनी कमज़ोर आवाज़ में जज से कहा, “माय लॉर्ड, तीन साल पहले मेरी पत्नी ने मुझ पर जानलेवा हमला किया था। मैं मरा नहीं, बल्कि कोमा में चला गया था। मेरे वफादार स्टाफ ने मुझे गुप्त रूप से विदेश में इलाज के लिए भेजा ताकि मेरी जान बचाई जा सके। मैं आज अपनी पत्नी का असली चेहरा दुनिया को दिखाने आया हूँ।”
कबीर स्तब्ध रह गया। अगर अमित ज़िंदा था, तो हत्या का केस तो खत्म हो गया, लेकिन मीरा पर जानलेवा हमले (Attempt to Murder) का संगीन जुर्म अब तय था।
कबीर ने मीरा की तरफ देखा, लेकिन मीरा कबीर को नहीं, बल्कि अमित के पीछे खड़े उस शख्स को देख रही थी जो अमित की व्हीलचेयर को धक्का दे रहा था। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि कबीर का सबसे भरोसेमंद दोस्त रोहन था! रोहन के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।
मीरा ने कबीर की तरफ देखा और बुदबुदाई, “कबीर… तुम जिसे अपना दोस्त समझ रहे हो, वह दोस्त नहीं, इस पूरी साज़िश का मास्टरमाइंड है। मुझे फंसाने के लिए अमित को यहाँ रोहन ही लेकर आया है…”
कबीर का दिमाग सुन्न हो गया। उसका सबसे अच्छा दोस्त और उसका प्यार—दोनों आमने-सामने थे। सच क्या था? क्या मीरा वाकई बेकसूर थी, या कबीर एक बहुत बड़ी साज़िश का मोहरा बन चुका था?
आगे क्या होगा? क्या रोहन वाकई विलेन है? अमित मेहरा के ज़िंदा होने के पीछे का असली राज़ क्या है? और क्या कबीर अपनी मोहब्बत को जेल जाने से बचा पाएगा?
जानिए इस कहानी के अंतिम और निर्णायक भाग (Concluding Part) में… अगला और आखिरी भाग अगले शनिवार, सुबह 10:00 बजे रिलीज़ होगा! जुड़े रहिए RealShePowerHindi के साथ!




