एक बार की बात है, पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गांव में चीकू नाम का एक नन्हा खरगोश रहता था। चीकू बहुत प्यारा था, लेकिन उसकी एक आदत थोड़ी अजीब थी।
वह हर चीज़ को लेकर सवाल पूछता था।
“पेड़ ऊपर ही क्यों बढ़ते हैं?”
“चांद हमारे साथ-साथ क्यों चलता है?”
“तितलियां फूलों पर बैठकर क्या बातें करती हैं?”
गांव के जानवर कभी हंसते, कभी परेशान होते।
लेकिन चीकू को जवाब चाहिए ही चाहिए था।
एक सुबह उसने आसमान की ओर देखा तो उसे एक छोटा-सा भूरा बादल दिखाई दिया।
बादल अकेला था।
और सबसे अजीब बात यह थी कि वह बाकी बादलों से बहुत दूर था।
चीकू ने आवाज लगाई,
“अरे बादल! तुम यहां अकेले क्यों हो?”
बादल ने धीरे से कहा,
“क्योंकि मैं बारिश करना भूल गया हूं।”
चीकू की आंखें गोल हो गईं।
“बारिश करना भी कोई भूल सकता है?”
बादल उदास होकर बोला,
“हां। मैं पिछले कई दिनों से कोशिश कर रहा हूं। मैं जोर लगाता हूं, गोल-गोल घूमता हूं, खुद को भारी बनाता हूं… लेकिन एक बूंद भी नहीं गिरती।”
चीकू ने थोड़ा सोचा।
फिर बोला,
“चिंता मत करो। मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”
चीकू की पहली कोशिश
चीकू बादल को गांव के तालाब के पास ले गया।
“तालाब को देखो,” उसने कहा, “शायद पानी देखकर तुम्हें याद आ जाए कि बारिश कैसे करते हैं।”
बादल ने तालाब को देखा।
लेकिन कुछ नहीं हुआ।
“नहीं आया याद,” बादल बोला।
दूसरी कोशिश
चीकू उसे एक खेत में ले गया।
वहां पौधे मुरझाए हुए थे।
चीकू ने कहा,
“देखो, इन पौधों को पानी चाहिए।”
बादल ने नीचे देखा।
उसका मन भर आया।
उसने पूरी ताकत लगाई।
एक…
दो…
तीन…
टप!
एक छोटी-सी बूंद नीचे गिरी।
चीकू खुशी से उछल पड़ा।
“तुम कर सकते हो!”
लेकिन फिर बादल बिल्कुल शांत हो गया।
“बस एक बूंद,” वह बोला।
“एक बूंद भी शुरुआत होती है,” चीकू ने मुस्कुराकर कहा।
फिर कुछ अद्भुत हुआ
चीकू ने गांव के सभी जानवरों को बुलाया।
गिलहरी थोड़े-से बीज लेकर आई।
हाथी अपनी सूंड में पानी लेकर आया।
हिरन पौधों के पास सूखी मिट्टी हटाने लगा।
चिड़ियां छोटे-छोटे बीज लाने लगीं।
यह देखकर बादल चुपचाप सबको देखता रहा।
किसी ने उससे यह नहीं पूछा कि वह कितनी बारिश कर सकता है।
किसी ने उसे कमजोर नहीं कहा।
सब बस अपना छोटा-सा काम कर रहे थे।
बादल की आंखों में चमक आ गई।
उसने गहरी सांस ली।
फिर…
टप… टप… टप…
कुछ बूंदें गिरने लगीं।
चीकू ने ऊपर देखा।
“और!”
बादल हंस पड़ा।
और अचानक आसमान से तेज बारिश होने लगी।
गांव के बच्चे बाहर आ गए।
पौधे झूमने लगे।
तालाब भरने लगा।
चीकू बारिश में नाचने लगा।
और वह छोटा भूरा बादल अब अकेला नहीं था।
बाकी बादल भी उसके पास आ गए थे।
बादल ने चीकू से एक बात कही
बारिश रुकने के बाद बादल ने कहा,
“आज मुझे समझ आया कि मैं बारिश करना नहीं भूला था।”
चीकू ने पूछा,
“तो फिर क्या हुआ था?”
बादल मुस्कुराया।
“मैं बस यह भूल गया था कि छोटी-सी कोशिश भी कोशिश होती है।”
चीकू कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला,
“तो फिर आज से हम दोनों एक नियम बनाएंगे।”
“कौन सा?” बादल ने पूछा।
चीकू ने अपनी छोटी-सी उंगली ऊपर उठाई और कहा,
“अगर पहली बार में काम न हो, तो थोड़ा छोटा करके फिर कोशिश करेंगे।”
बादल ने हंसते हुए कहा,
“पक्का!”
उस दिन के बाद गांव में जब भी कोई किसी काम में असफल होता, चीकू मुस्कुराकर कहता,
“याद है न? एक बूंद भी शुरुआत होती है।”
और शायद इसी वजह से उस गांव में बारिश से ज्यादा उम्मीद बरसने लगी।
🌈 कहानी की सीख
छोटी कोशिश कभी छोटी नहीं होती।
कभी-कभी हमें सफलता से पहले सिर्फ इतना करना होता है कि हम एक बार और कोशिश करें।




