क्या आपने कभी सोचा कि कचरे में फेंका जाने वाला नारियल का खोल किसी को रातोंरात करोड़पति बना सकता है? यह कहानी है केरल की मारिया कुरियाकोस (Maria Kuriakose) की, जिन्होंने नारियल के खोल को न सिर्फ़ एक बिज़नेस आइडिया में बदला, बल्कि इससे एक करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर दिखाया। उनकी कंपनी ‘थेंगा कोको’ आज पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के लिए देश-विदेश में मशहूर है, जो नारियल के खोल से बने स्टाइलिश बाउल, कप, लैंप और सजावटी सामान बनाती है। यह उद्यम न केवल पर्यावरण को सहारा देता है, बल्कि केरल की महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें स्थायी रोजगार भी प्रदान करता है। आइए, जानते हैं मारिया की इस प्रेरक यात्रा के बारे में।
नारियल के खोल से शुरू हुआ सफर
साल 2019 में केरल के त्रिशूर में मारिया ने कुछ नारियल के खोल इकट्ठा किए, जो आमतौर पर कचरे में फेंक दिए जाते हैं। उन्होंने इन खोलों को साफ किया, सैंडपेपर से चिकना किया और मेहनत से उन्हें स्टाइलिश, पर्यावरण अनुकूल कटोरों में बदल दिया। यह छोटा-सा प्रयोग आज ‘थेंगा कोको’ के रूप में एक बड़ा उद्यम बन चुका है। मलयालम में ‘थेंगा’ का अर्थ नारियल होता है, और मारिया ने इस नाम के साथ अपने बिज़नेस को एक अनोखी पहचान दी। वित्त वर्ष 2022-23 में इस कंपनी ने 1 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो उनकी मेहनत और दूरदर्शिता का सबूत है।
‘कल्पवृक्ष’ से प्रेरणा
नारियल का पेड़, जिसे ‘कल्पवृक्ष’ कहा जाता है, अपने हर हिस्से के उपयोग के लिए जाना जाता है। इसका तना, फल, जड़ें और फूल, सब कुछ काम आता है। मारिया को इसकी अहमियत का गहरा अहसास था। 2016 में उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और फिर आगे की पढ़ाई के लिए स्पेन चली गईं। 2017 में वे मुंबई लौटीं और एऑन हेविट में सलाहकार के रूप में काम शुरू किया। लेकिन उनका मन हमेशा कुछ ऐसा करने में था, जो पर्यावरण और समाज के लिए फायदेमंद हो।
नौकरी छोड़ शुरू किया सामाजिक कार्य
2018 में मारिया ने अपनी अच्छी-खासी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी और ‘मैना महिला फाउंडेशन’ से जुड़ गईं। यह संगठन मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाता है और मुंबई की मलिन बस्तियों में सस्ते सैनिटरी पैड उपलब्ध कराता है। इस अनुभव ने मारिया को सामाजिक बदलाव की ताकत से और करीब ला दिया। यहीं से उनके मन में एक ऐसा बिज़नेस शुरू करने का विचार आया, जो पर्यावरण और समुदाय, दोनों को लाभ पहुंचाए।
‘थेंगा कोको’ का विस्तार और प्रभाव
आज ‘थेंगा कोको‘ केरल के कोट्टायम, कोडुंगल्लूर, मेट्टुपालयम और एलेप्पी जैसे क्षेत्रों में फैले किसानों और कारीगरों के एक मजबूत नेटवर्क के साथ काम करता है। इस वेंचर में 30 से अधिक लोग कार्यरत हैं, जिनमें 80% महिलाएं हैं। ये महिला कारीगर अपने हस्तशिल्प से 20,000-25,000 रुपये की मासिक आय अर्जित करती हैं, जो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है।
मारिया के उत्पादों की मांग न केवल भारत के बड़े शहरों जैसे चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता और दिल्ली-एनसीआर में है, बल्कि डेनमार्क, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में भी इनकी खूब डिमांड है। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मांग स्थानीय ऑर्डर से कहीं अधिक है, जो इस बिज़नेस की वैश्विक अपील को दर्शाता है।
एक प्रेरणा, एक संदेश
मारिया कुरियाकोस की कहानी हमें सिखाती है कि कचरे में भी अवसर छिपे हो सकते हैं। नारियल के खोल जैसे अनुपयोगी समझे जाने वाले संसाधन को उन्होंने न केवल एक लाभकारी बिज़नेस में बदला, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया। ‘थेंगा कोको’ आज एक मिसाल है कि मेहनत, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।
मारिया की इस कहानी से प्रेरणा लेकर हम सभी अपने आसपास के संसाधनों को नए नजरिए से देख सकते हैं। कौन जानता है, शायद आपका अगला बड़ा आइडिया भी किसी ‘कचरे’ में छिपा हो!