जंगल की सबसे अनोखी दौड़
एक हरे-भरे जंगल में हर साल एक बड़ी दौड़ होती थी। इसमें खरगोश, हिरण, बंदर, गिलहरी, कछुआ और कई दूसरे जानवर हिस्सा लेते थे। इस बार सभी को पूरा विश्वास था कि तेज़ दौड़ने वाला हिरण ही जीतेगा।
दौड़ शुरू हुई।
हिरण हवा की तरह दौड़ने लगा। खरगोश उसके पीछे था। बंदर पेड़ों से छलांग लगाते हुए आगे बढ़ रहा था।
लेकिन कुछ ही दूर जाने पर सबने देखा कि एक छोटा-सा हाथी का बच्चा कीचड़ में फँस गया है। वह डर के मारे रो रहा था।
हिरण ने सोचा, “अगर मैं रुका तो हार जाऊँगा।”
खरगोश भी आगे निकल गया।
तभी धीरे-धीरे चलता हुआ कछुआ वहाँ पहुँचा। उसने बिना कुछ सोचे हाथी के बच्चे से कहा, “घबराओ मत, हम सब मिलकर तुम्हें बाहर निकालेंगे।”
कछुए ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, “दोस्तों, किसी को मदद चाहिए!”
उसकी आवाज़ सुनकर गिलहरी, बंदर और कुछ पक्षी लौट आए। बंदर ने बेल लाकर दी। गिलहरी ने छोटे-छोटे पत्थर हटाए। पक्षियों ने बाकी जानवरों को बुलाया।
यह देखकर हिरण भी वापस आ गया।
सबने मिलकर ज़ोर लगाया और थोड़ी ही देर में हाथी का बच्चा कीचड़ से बाहर निकल आया।
वह खुशी से उछल पड़ा।
अब सभी जानवर फिर से दौड़ की ओर बढ़े।
जब वे अंतिम रेखा तक पहुँचे, तो जंगल के राजा शेर ने मुस्कुराते हुए कहा,
“आज कोई एक विजेता नहीं है। आज इस दौड़ को उन सभी ने जीता है जिन्होंने किसी की मदद करने के लिए अपनी जीत की परवाह नहीं की।”
सभी जानवरों ने तालियाँ बजाईं। हिरण ने कछुए से कहा,
“आज तुमने हमें सिखाया कि सबसे तेज़ वही नहीं होता जो सबसे पहले पहुँच जाए, बल्कि वह होता है जो रास्ते में किसी को पीछे नहीं छोड़ता।”
उस दिन के बाद जंगल की हर दौड़ का एक नया नियम बन गया।
“अगर रास्ते में किसी को मदद की ज़रूरत हो, तो पहले मदद करना ही सबसे बड़ी जीत है।”
दूसरों की मदद करना सबसे बड़ी बहादुरी है। असली विजेता वही होता है जो अपनी सफलता के साथ दूसरों की भी चिंता करे।




