देश में हर तीसरा चार्टर्ड अकाउंटेंट एक महिला

देश में हर तीसरा चार्टर्ड अकाउंटेंट एक महिला

राष्ट्रीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) दिवस 2025: इतिहास, महत्व और वैश्विक प्रभाव

राष्ट्रीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) दिवस 1 जुलाई को मनाया जाता है, जो भारतीय संविधान से एक साल पहले 1949 में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) की स्थापना का प्रतीक है। 2.5 लाख से अधिक सदस्यों के साथ, दुनिया भर में दूसरे सबसे बड़े लेखा निकाय के रूप में, आईसीएआई लेखांकन मानक निर्धारित करता है, पेशे को नियंत्रित करता है और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। यह कॉर्पोरेट प्रशासन, कराधान और जोखिम प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो भारत के आर्थिक विकास में इसके वैश्विक प्रभाव और स्थायी महत्व को दर्शाता है।

जीपी कपाड़िया पहले आईसीएआई अध्यक्ष 

आईसीएआई के पहले अध्यक्ष जी.पी. कपाड़िया और उपाध्यक्ष जी बसु थे। भारत सरकार ने एरस. वेंकटरामन को परिषद का पहला सचिव नियुक्त किया था। पहली बैठक 15 अगस्त 1949 को नई दिल्ली में आयोजित हुई थी, जिसका उद्धाटन उस समय के वाणिज्य मंत्री के.सी. नियोगी ने किया था। 

भारत में वर्तमान में साढ़े चार लाख से अधिक सीए कार्यरत हैं। जिसमें हर तीसरा सीए एक महिला है। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट (आईसीएआई) के अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा ने बताया कि संस्था की स्थापना 1 जुलाई 1949 को हुई थी। तब से इस दिन को सीए दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ 1,700 सदस्यों और 259 छात्रों से शुरु होकर आज आईसीएआई विश्व की सबसे बड़ी लेखा संस्था बन चुकी है, जिसके पास लगभग 4.5 लाख सदस्य और 10.5 लाख छात्र हैं। इसके सदस्यों में हर तीसरे चार्टर्ड अकाउंटेंट का एक महिला होना वित्तीय क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को दर्शाता है। 

नई दिल्ली: चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षाओं के विभिन्न स्तरों में न केवल महिला उम्मीदवार अव्वल रही हैं, बल्कि क्वालीफायर या पास-आउट में अब रिकॉर्ड 48% की हिस्सेदारी है। कुल मिलाकर, महिला CA की हिस्सेदारी अब 30% है, जो 2000 में सिर्फ़ 8% थी।

8.63 लाख छात्रों में भी 43% महिलाएँ हैं।

भारत में अकाउंटिंग और ऑडिटिंग की आउटसोर्सिंग से नए अवसर मिल रहे हैं और एक फ्रेशर के लिए औसत वार्षिक वेतन 12.5 लाख रुपये है, साथ ही कोर्स करने की सुविधा और पढ़ाई की किफ़ायती लागत भी बड़ी आकर्षण है। गौरतलब है कि अब ज़्यादा महिला टॉपर हैं – 2020 में फ़ाइनल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में छह में से चार और 2021 में पुराने और नए कोर्स दोनों परीक्षाओं में सभी टॉपर। महिला उम्मीदवारों ने अगले दो सालों में भी 2021 की अपनी उपलब्धि दोहराई। उल्लेखनीय रूप से, पिछले एक दशक में 75 महिला उम्मीदवारों ने विभिन्न स्तरों पर CA परीक्षाओं में टॉप किया है।

2023 में, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप एक नया पाठ्यक्रम पेश किया। आईसीएआई के अध्यक्ष रंजीत कुमार अग्रवाल ने टीओआई को बताया, “एकाउंटेंसी, टैक्स और फाइनेंस में इस पेशे में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ रही है।”

गांधीवादी विचारों से प्रेरित आर शिवभोगम पहली महिला सीए

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आर. शिवभोगम

जब भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे पर पुरुषों का वर्चस्व था, उस समय चेन्नई में जन्मी आर. शिवभोगम को भारत की पहली महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट के रुप में देखा जाता है। वह न केवल अकाउंट के काम में अव्वल थी बल्कि वह एक सत्याग्रही भी थी। लेडी वेलिंगटन स्कूल और क्वीन मैरी कॉलेज से शिक्षा पूरी करने के बाद उनकी जीवन की दिशा तब बदली जब उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और एक वर्ष की जेल भी काटी।

जेल में ही उन्होंने निर्णय लिया कि वह लेखा क्षेत्र में अपना करियर बनाएगी। वर्ष 1933 में उन्होंने चार्टर्ड अकांउंटेंसी की परीक्षा पास की और भारत की पहली महिला सीए बनीं। ब्रिटिश राज में जेल से रिहा महिला को प्रैक्टिस की अनुमति नहीं थी। उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती।  

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