उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिहं धामी की सरकार ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे विकास योजना जैसी योजनाएँ लागू की हैं। यह योजना होमस्टे संचालकों को वित्तीय प्रोत्साहन और प्रशिक्षण प्रदान करती है। उत्तराखंड सरकार पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में महिला उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करती है।
इन प्रोत्साहनों में पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी और पर्यटन से संबंधित व्यवसाय स्थापित करने के लिए सहायता शामिल है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ प्रदान करता है।
राज्य सरकार द्वारा होमस्टे को प्रोत्साहन देने के लिए शुरु की गई नीतियों के कारण आज उत्तराखंड में महिलाओं द्वारा संचालित होमस्टे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बिन्दु बने हुए है। इनके माध्यम से स्थानीय महिलायें पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन उपलब्ध करा रही है और स्थानीय आवाभगत एवं स्थानीय संस्कृति से पर्यटकों का परिचय भी हो रहा है। राज्य सरकार के द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का फायदा उठाने के लिए कई जागरुक महिलायें एवं महिलाओं के संगठन आगे आ रहे है और इसके माध्यम से स्थानीय महिलाओं का जीवन स्तर सुधार रहें है इनमें से होमस्टे पिछले कुछ समय से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ये एक गहन पर्यटन अनुभव प्रदान करते हैं, जहाँ आगंतुकों को स्थानीय मेज़बान के घर में मुफ़्त में रहने का मौका मिलता है।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले की ताकुला तहसील में बिनसर वन्यजीव अभयारण्य के निकट होने के कारण पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। इसने सेवा भारत को उस क्षेत्र की उन महिलाओं को एक साथ लाने के लिए प्रेरित किया जो उद्यमी बनने में रुचि रखती थीं और महिलाओं द्वारा संचालित होमस्टे व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं। जिनके घर में एक अतिरिक्त कमरा था और जो उसे किराए पर देने को तैयार थीं, उन्हें आतिथ्य सत्कार की बुनियादी बातों और अपने व अपने मेहमानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओं ने अपने होमस्टे को उत्तराखंड पर्यटन विभाग के साथ पंजीकरण के योग्य बनाने के लिए थोड़ा निवेश भी किया। यह लाइसेंस जारी करवाने, कमरे में अग्निशामक यंत्र लगाने और बिस्तर, रजाई और बाल्टी सहित कई वस्तुओं की सूची तैयार करने से संबंधित है।
सारी गांव महिलाओं द्वारा संचालित होमस्टे का अप्रीतम उदाहरण है। सारी गांव उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ ब्लॉक में स्थित है। यह गाँव देवरिया ताल झील की ओर जाने वाले ट्रेकर्स के लिए एक लोकप्रिय पड़ाव है। उत्तराखंड के सारी गाँव में, होमस्टे पहल आगंतुकों को स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है और साथ ही निवासियों के लिए आर्थिक प्रगति के अवसर भी प्रदान करती है।
सारी गाँव एक “इकोविलेज” है जिसका उद्देश्य समुदाय-आधारित पर्यटन (सीबीटी) के माध्यम से स्थायी पर्यटन प्रथाओं को विकसित करना है। इसमें स्थानीय निवासियों को आवास, भोजन और मार्गदर्शन सेवाएँ प्रदान करने में शामिल किया जाता है, जिससे समुदाय के भीतर सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
स्थानीय समुदायों के लिए लाभ: होमस्टे आय और रोजगार उत्पन्न करते हैं और ग्रामीण पलायन को कम करते हैं, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं और स्थायी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं। आगंतुक स्थानीय परंपराओं, व्यंजनों, हस्तशिल्प और लोककथाओं में खुद को डुबो सकते हैं, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है।
सारी गाँव में कई होमस्टे संचालित होते हैं, जिनमें चौखंबा होमस्टे, रिद्धि होमस्टे सारी और माल्टा बाय अर्थली (कैफ़े और होमस्टे) शामिल हैं। ये होमस्टे बजट-अनुकूल विकल्पों से लेकर पहाड़ी दृश्यों वाले अधिक आरामदायक आवासों तक, कई प्रकार की सुविधाएँ और किफ़ायती मूल्य प्रदान करते हैं।
चुनौतियाँ और अवसर: होमस्टे पर्यटन के कई लाभ हैं, लेकिन व्यावसायीकरण और नीतिगत कमियों जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाना आवश्यक है। लाभों को अधिकतम करने और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत नीतियों, क्षमता निर्माण, बेहतर बुनियादी ढाँचे और लक्षित विपणन सहित रणनीतिक हस्तक्षेप की जरुरत है।
कुल मिलाकर, सारी गाँव में होमस्टे पहल स्थानीय समुदायों का समर्थन एवं प्रोत्साहन करता है। सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए और उत्तराखंड में एक अधिक टिकाऊ पर्यटन मॉडल में योगदान देते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।