शारदीय नवरात्रि के दिव्य पर्व में तीसरे दिन (तृतीया तिथि) आदिशक्ति के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। माँ चंद्रघंटा अलौकिक तेज, शांति और अदम्य साहस की देवी मानी जाती हैं। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिस कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।
मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा की उपासना से साधक के जीवन से भय, मानसिक तनाव और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
1. माँ चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप सौम्य और कल्याणकारी होने के साथ-साथ एक वीरांगना का भी है। इनका वाहन सिंह है और इनकी दस भुजाएँ हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल, त्रिशूल, गदा, खड्ग और माला जैसे अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।
- साहस और सौम्यता का संतुलन: देवी का यह स्वरूप सिखाता है कि जीवन में शांति और करुणा बनाए रखते हुए भी अन्याय के विरुद्ध साहस से खड़े होना कितना आवश्यक है।
- घंटे की ध्वनि का रहस्य: माँ के हाथ में मौजूद घंटे की प्रचंड ध्वनि से असुर और नकारात्मक शक्तियाँ भयभीत होकर दूर भागती हैं।
2. माँ चंद्रघंटा पूजा विवरण (Key Overview)
| विवरण | विवरण जानकारी |
| देवी स्वरूप | माँ चंद्रघंटा (तृतीय नवदुर्गा) |
| तिथि | अश्विन शुक्ल तृतीया |
| शुभ रंग (Navratri Colour) | लाल (Red) — शक्ति और उल्लास का प्रतीक |
| प्रिय पुष्प | लाल या पीले फूल (जैसे कमल, गुड़हल या गेंदा) |
| मुख्य भोग | दूध से बनी खीर, रबड़ी या मेवे की मिठाई |
| मुख्य मंत्र | ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ |
3. माँ चंद्रघंटा का प्रिय भोग और शुभ रंग
- प्रिय भोग: माँ चंद्रघंटा को दूध से बने पकवान विशेष प्रिय हैं। तीसरे दिन देवी को केसर युक्त खीर, रबड़ी या दूध की मिठाई का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- शुभ रंग: इस दिन पूजा में लाल रंग के वस्त्र पहनना या लाल पुष्प चढ़ाना देवी की कृपा पाने का उत्तम माध्यम है।
4. माँ चंद्रघंटा की पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
- स्नान व संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर लाल रंग) धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।
- दीपक प्रज्वलित करें: कलश देवता और माँ दुर्गा के समक्ष देसी घी का दीपक और धूप जलाएं।
- तिलक व रोली: माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र पर रोली, अक्षत, चंदन और कुमकुम अर्पित करें।
- पुष्प अर्पित करें: देवी को लाल गुड़हल या गेंदे के फूल अर्पित करें।
- भोग लगाएं: दूध से बनी खीर अथवा मिठाइयों का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप व आरती: देवी के ध्यान मंत्र का 108 बार जाप करें और अंत में माँ दुर्गा व माँ चंद्रघंटा की आरती गाकर प्रसाद वितरित करें।
5. माँ चंद्रघंटा मंत्र (Mantras)
ध्यान मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
साधारण बीज मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
6. पौराणिक व्रत कथा (Vrat Katha)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों का राजा महिषासुर देवलोक पर अपना अधिकार जमाना चाहता था और देवताओं को प्रताड़ित कर रहा था, तब सभी देवता त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के पास पहुंचे। त्रिदेवों के क्रोध और दिव्य तेज से एक परम शक्ति प्रकट हुईं, जिन्हें देवी दुर्गा कहा गया।
जब असुरों से युद्ध की घड़ी आई, तब भगवान शिव ने अपना त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, देवराज इंद्र ने अपनी घंटी और अन्य देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र देवी को भेंट किए। देवी ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया और सिंह पर सवार होकर युद्ध भूमि में उतरीं। जब माँ ने अपने घंटे की भयंकर टंकार की, तो उस ध्वनि से महिषासुर की पूरी सेना कांप उठी। माँ चंद्रघंटा ने अपने पराक्रम से असुरों का संहार कर देवलोक में पुनः धर्म और शांति की स्थापना की।




