Eco-Friendly क्रिसमस 2025
क्रिसमस खुशियों, रोशनी और उपहारों का त्योहार है। लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की चुनौतियां बढ़ रही हैं, हमारे उत्सव मनाने के तरीकों पर सवाल उठना लाजिमी है। भारत जैसे देश में, जहाँ त्योहारों का सामाजिक महत्व बहुत अधिक है, वहां क्रिसमस के बाद निकलने वाला टन भर कचरा—खासकर प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री—एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बनता जा रहा है।
क्या हम बिना प्रकृति को चोट पहुँचाए ‘मैरी क्रिसमस’ कह सकते हैं? आइए, इस शोधपरक लेख में समझते हैं कि ‘ग्रीन क्रिसमस’ (Green Christmas) समय की मांग क्यों है और हम इसे कैसे अपना सकते हैं।
असली बनाम प्लास्टिक पेड़: कार्बन फुटप्रिंट का विज्ञान
क्रिसमस की सबसे बड़ी बहस ‘असली पेड़ (Natural Tree)’ बनाम ‘प्लास्टिक पेड़ (Artificial Tree)’ के इर्द-गिर्द घूमती है। अधिकांश लोग यह सोचकर प्लास्टिक का पेड़ खरीदते हैं कि इसे सालों-साल इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पेड़ बचेंगे। लेकिन शोध कुछ और ही कहता है।
- प्लास्टिक पेड़ का सच: एक औसत आर्टिफिशियल पेड़ PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड) और स्टील से बना होता है, जिसे रीसायकल करना लगभग असंभव है। ‘द कार्बन ट्रस्ट’ के अनुसार, एक 2-मीटर ऊंचे प्लास्टिक पेड़ का कार्बन फुटप्रिंट लगभग 40 किलोग्राम CO2 होता है। इसे पर्यावरण के अनुकूल होने के लिए कम से कम 10 से 12 साल तक इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जबकि औसत परिवार इसे 5-6 साल में बदल देते हैं।
- असली पेड़ का लाभ: जीवित पेड़ अपने जीवनकाल में CO2 सोखते हैं। यदि इन्हें उत्सव के बाद सही तरीके से खाद (Compost) में बदल दिया जाए या दोबारा रोप दिया जाए, तो इनका कार्बन फुटप्रिंट प्लास्टिक के मुकाबले 60% से 80% तक कम होता है।
भारत के लिए विकल्प: भारत में हम ‘क्रिसमस ट्री’ के रूप में गमले में लगे अराकारिया (Araucaria) या नीम और अशोक के पौधों को सजा सकते हैं, जिन्हें बाद में बगीचे में लगाया जा सकता है।
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बाजारों में मिलने वाली सस्ती चीनी लाइटें और प्लास्टिक के सजावटी सामान ‘सिंगल-यूज़ प्लास्टिक’ के ढेर को बढ़ाते हैं। भारत में हमारे पास हस्तशिल्प की एक समृद्ध विरासत है जिसे हम क्रिसमस में शामिल कर सकते हैं।
- मिट्टी के दीये और टेराकोटा: मोमबत्तियों (जो अक्सर पैराफिन वैक्स से बनी होती हैं) के बजाय स्थानीय कुम्हारों से बने मिट्टी के दीयों का उपयोग करें। यह न केवल इको-फ्रेंडली है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा देता है।
- हस्तशिल्प का उपयोग: कांच की गेंदों के बजाय कपड़े के बने खिलौने, जूट की डोरी, और लकड़ी की नक्काशी वाले गहनों का प्रयोग करें। कोंडापल्ली (आंध्र प्रदेश) या चन्नपटना (कर्नाटक) के लकड़ी के खिलौने क्रिसमस ट्री पर अद्भुत लगते हैं।
उपहारों की सस्टेनेबल पैकेजिंग: ‘जीरो वेस्ट’ की ओर कदम
अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर क्रिसमस के दौरान इस्तेमाल होने वाला ‘रैपिंग पेपर’ इतना अधिक होता है कि उससे पृथ्वी को कई बार लपेटा जा सकता है। अधिकांश रैपिंग पेपर चमकदार और प्लास्टिक-कोटेड होते हैं, जिन्हें रीसायकल नहीं किया जा सकता।
- फुरोशिकी (Furoshiki) तकनीक: यह उपहारों को कपड़े में लपेटने की एक जापानी कला है। आप पुराने स्कार्फ या सुंदर सूती कपड़े का उपयोग कर सकते हैं, जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके।
- अखबार और ब्राउन पेपर: पुराने समाचार पत्रों के ‘कॉमिक्स’ सेक्शन या सादे ब्राउन पेपर को जूट की रस्सी और सूखी पत्तियों से सजाकर एक विंटेज और क्लासी लुक दिया जा सकता है।
‘सचेत खान-पान’ (Conscious Dining) और वेस्ट मैनेजमेंट
क्रिसमस के जश्न में भोजन की बर्बादी एक बड़ा मुद्दा है। शोध बताते हैं कि उत्सवों के दौरान ‘फूड वेस्ट’ में 25% तक की वृद्धि होती है, जो लैंडफिल में जाकर मीथेन जैसी हानिकारक गैसें उत्पन्न करता है।
- स्थानीय और मौसमी: आयातित फलों और खाद्य पदार्थों के बजाय स्थानीय स्तर पर उगाई गई सब्जियों और फलों का चयन करें। इससे ‘फूड माइल्स’ (परिवहन से होने वाला प्रदूषण) कम होता है।
- खाद बनाना (Composting): बचा हुआ जैविक कचरा फेंकने के बजाय उसे खाद में बदलें। 2025 के इस दौर में, होम-कंपोस्टिंग किट आसानी से उपलब्ध हैं।
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भारत में कई समुदाय अब ‘इको-क्रिसमस’ को एक आंदोलन की तरह ले रहे हैं। मिजोरम और मेघालय जैसे राज्यों में, जहाँ क्रिसमस बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, वहां के स्थानीय चर्च अब बांस की सजावट और प्राकृतिक रंगों पर जोर दे रहे हैं।
जब हम स्थानीय कारीगरों से सामान खरीदते हैं, तो हम न केवल कार्बन फुटप्रिंट कम करते हैं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के सपने को भी सच करते हैं। मिट्टी के दीये, हाथ से बुने हुए मोजे और जैविक चॉकलेट्स इस त्योहार को और भी सार्थक बनाते हैं।
निष्कर्ष: खुशियाँ बाँटें, कचरा नहीं
पर्यावरण के अनुकूल क्रिसमस मनाना किसी परंपरा को छोड़ना नहीं है, बल्कि उसे अधिक जिम्मेदारी और प्रेम के साथ निभाना है। उपहारों की चमक कम न हो, लेकिन वह चमक प्रकृति की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
इस साल, जब आप अपने घर में सितारे लगाएं, तो यह सुनिश्चित करें कि वह सितारा कल किसी समुद्र या मिट्टी के ढेर में कचरा बनकर न मिले। एक छोटा सा बदलाव—जैसे प्लास्टिक ट्री न खरीदना या कपड़े में उपहार लपेटना—आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पृथ्वी का सबसे बड़ा उपहार हो सकता है।
मैरी ‘ग्रीन’ क्रिसमस!

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