मकर संक्रांति का पर्व आते ही चारों ओर एक ही गूंज सुनाई देती है— “तिल-गुड़ घ्या आणि गोड-गोड बोला” (तिल-गुड़ लें और मीठा बोलें)। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक, मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का उपहार देना एक पुरानी और सुंदर परंपरा है। लेकिन यह परंपरा केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। तिल और गुड़ का यह संगम ज्योतिष, आयुर्वेद और विज्ञान का एक अनूठा उदाहरण है।
इस लेख में हम जानेंगे कि मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ क्यों अनिवार्य है और यह हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद है।
ज्योतिषीय महत्व: सूर्य और शनि का मिलाप
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करते हैं।
- गुड़ का संबंध: गुड़ को सूर्य का प्रतीक माना जाता है।
- तिल का संबंध: तिल को शनि देव का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) के बीच अनबन रहती है, लेकिन संक्रांति के दिन सूर्य स्वयं अपने पुत्र के घर जाते हैं। तिल और गुड़ को मिलाकर लड्डू बनाना और बांटना इस बात का प्रतीक है कि कड़वाहट को भूलकर रिश्तों में मिठास घोली जाए। तिल का दान करने से शनि दोष दूर होते हैं और गुड़ का सेवन करने से सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आयुर्वेद और वैज्ञानिक लाभ: सर्दियों का अमृत
मकर संक्रांति का त्यौहार कड़ाके की ठंड के दौरान आता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय शरीर को ऐसी ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो अंदर से गर्माहट प्रदान करे।
- शरीर का तापमान: तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। इनका सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और सर्दी-जुकाम से बचाता है।
- ऊर्जा का स्रोत: गुड़ एक प्राकृतिक ऊर्जा प्रदायक है, वहीं तिल में स्वस्थ वसा (Healthy Fats) और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, जो थकान को दूर करता है।
- हड्डियों की मजबूती: तिल कैल्शियम और मैग्नीशियम का खजाना है, जो हड्डियों और जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है।
- पाचन में सहायक: गुड़ शरीर के पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है।
पारंपरिक तिल के लड्डू: बनाने की विधि
मकर संक्रांति पर घर में बने शुद्ध तिल-गुड़ के लड्डू का आनंद ही कुछ और है। यहाँ इसकी सबसे आसान रेसिपी दी गई है:
सामग्री:
- 2 कप सफेद तिल
- 1.5 कप बारीक कटा हुआ गुड़
- 2 बड़े चम्मच घी
- आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर
- 1/4 कप भुनी हुई मूंगफली के दाने (दरदरे पिसे हुए)
विधि:
- तिल भूनें: एक भारी तले की कड़ाही में सफेद तिल डालें और मध्यम आंच पर हल्का सुनहरा और चटकने तक भून लें। इसे एक प्लेट में निकाल लें।
- गुड़ की चाशनी: उसी कड़ाही में घी और गुड़ डालें। धीमी आंच पर गुड़ को पिघलने दें। जब गुड़ में बुलबुले उठने लगें, तो एक कटोरी पानी में एक बूंद गुड़ डालकर चेक करें। यदि गुड़ सख्त होकर जम जाए, तो समझें चाशनी तैयार है।
- मिश्रण तैयार करें: अब इसमें भुने हुए तिल, मूंगफली और इलायची पाउडर डालें। गैस बंद करें और जल्दी से अच्छी तरह मिलाएं।
- लड्डू बांधें: हथेलियों पर थोड़ा घी या पानी लगाएं और मिश्रण के हल्का गर्म रहते ही छोटे-छोटे गोल लड्डू बना लें। (सावधानी: मिश्रण ज्यादा ठंडा न होने दें, वरना लड्डू नहीं बंधेंगे)।
निष्कर्ष
तिल और गुड़ का यह मेल हमें सिखाता है कि जिस तरह छोटे-छोटे तिल गुड़ की मिठास के साथ जुड़कर एक मजबूत लड्डू बन जाते हैं, उसी तरह हमें भी समाज में मिठास और एकता के साथ रहना चाहिए। 14 जनवरी 2026 को आप भी अपनों को तिल-गुड़ खिलाएं और रिश्तों में नई मिठास लाएं।
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