मकर संक्रांति 2026: एक त्यौहार, अनेक नाम; जानें भारत के विभिन्न राज्यों में इसके विविध रूप

मकर संक्रांति 2026: एक त्यौहार, अनेक नाम; जानें भारत के विभिन्न राज्यों में इसके विविध रूप

भारत एक ऐसा देश है जहाँ कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर भाषा और खान-पान बदल जाता है। लेकिन भारत की खूबसूरती यह है कि यहाँ के त्यौहार पूरे देश को एक सूत्र में पिरो देते हैं। मकर संक्रांति इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 14 जनवरी 2026 को जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तो पूरा भारत उत्सव मना रहा होगा, लेकिन हर राज्य का अपना एक अनूठा अंदाज और नाम होगा।

आइए, कन्याकुमारी से कश्मीर तक मकर संक्रांति के इन विविध और सुंदर रूपों की यात्रा करते हैं।

1. दक्षिण भारत: पोंगल (तमिलनाडु)


Pongal Festival of Tamil Nadu - Sikkimexpress

तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से किसानों का त्यौहार है।

  • महत्व: लोग इंद्र देव और सूर्य देव की पूजा करते हैं ताकि फसल अच्छी हो।
  • खास परंपरा: मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर ‘पोंगल’ (एक विशेष व्यंजन) बनाया जाता है। जब बर्तन से उबलता हुआ दूध बाहर गिरता है, तो लोग खुशी से “पोंगल-ओ-पोंगल” का उद्घोष करते हैं, जो समृद्धि का प्रतीक है।

2. पश्चिम भारत: उत्तरायण (गुजरात और राजस्थान)

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गुजरात में इस त्यौहार को उत्तरायण कहा जाता है, जो पूरी दुनिया में अपनी पतंगबाजी के लिए प्रसिद्ध है।

  • महत्व: यहाँ आसमान हजारों रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। अहमदाबाद में ‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ का आयोजन होता है।
  • खान-पान: इस दिन गुजरात में ‘उंधियू’ (सब्जियों का एक विशेष मेल) और जलेबी खाने की विशेष परंपरा है।

3. उत्तर-पूर्व भारत: माघ बिहू (असम)

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असम में इसे ‘माघ बिहू’ या ‘भोगली बिहू’ के नाम से जाना जाता है। ‘भोगली’ का अर्थ है भोग या आनंद।

  • महत्व: फसल कटाई का जश्न मनाने के लिए लोग बांस और पत्तों से ‘भेलाघर’ और ‘मेजी’ (एक प्रकार का अलाव) बनाते हैं।
  • खास परंपरा: रात भर लोग भेलाघर में उत्सव मनाते हैं, पारंपरिक नृत्य करते हैं और सुबह मेजी जलाकर अग्नि देव का आशीर्वाद लेते हैं। यहाँ तिल-पीठा (तिल से बनी मिठाई) मुख्य व्यंजन होता है।

4. उत्तर भारत: खिचड़ी और माघी (उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब)

उत्तर भारत में यह त्यौहार ‘दान और स्नान’ का महापर्व है।

  • उत्तर प्रदेश और बिहार: यहाँ इसे खिचड़ी कहा जाता है। लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और खिचड़ी, तिल, गुड़ व ऊनी कपड़ों का दान करते हैं। प्रयागराज में ‘माघ मेला’ इसी दिन से भव्य रूप लेता है।
  • पंजाब: यहाँ संक्रांति से एक दिन पहले ‘लोहड़ी’ मनाई जाती है और संक्रांति के दिन को ‘माघी’ कहा जाता है। इस दिन गन्ने के रस की खीर बनाने की परंपरा है।

5. मध्य और पूर्वी भारत: पौष संक्रांति (पश्चिम बंगाल, ओडिशा)

  • पश्चिम बंगाल: यहाँ इसे ‘पौष संक्रांति’ कहते हैं। गंगासागर में इस दिन विशाल मेला लगता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु ‘डुबकी’ लगाते हैं। यहाँ ‘पीठे’ (चावल के आटे से बनी मिठाई) बनाने का रिवाज है।
  • ओडिशा: यहाँ इसे ‘मकर चौला’ कहा जाता है। लोग नए कटे हुए चावल, केले और नारियल का भोग भगवान जगन्नाथ को लगाते हैं।
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विविधता में एकता का संदेश

नाम चाहे पोंगल हो, बिहू हो या उत्तरायण, इस त्यौहार का मूल भाव एक ही है— कृतज्ञता। हम प्रकृति को धन्यवाद देते हैं, सूर्य देव की ऊर्जा का स्वागत करते हैं और समाज में मिठास बांटते हैं। मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और मिलकर खुशियाँ मनाएं।

निष्कर्ष

14 जनवरी 2026 को आप भारत के किसी भी कोने में हों, मकर संक्रांति का यह उल्लास आपको अपनी संस्कृति पर गर्व करने का मौका देगा। यह सीरीज यहीं समाप्त होती है, जिसमें हमने तिथि, मुहूर्त, खिचड़ी, पतंगबाजी, तिल-गुड़ और क्षेत्रीय विविधताओं को विस्तार से समझा।

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