भारतीय सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर ऐसी फिल्में आती हैं जो एक्शन के मायने बदल देती हैं। आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर‘ (Dhurandhar) इसी श्रेणी की एक फिल्म है। जहाँ बॉलीवुड अक्सर ‘मसाला एक्शन’ और भौतिक विज्ञान के नियमों को ठेंगा दिखाने वाले स्टंट्स के लिए जाना जाता है, वहीं ‘धुरंधर’ ने ‘हॉलीवुड लेवल’ की टैक्टिकल फाइट्स और रॉ एक्शन पेश कर दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है।
रणवीर सिंह ने इस फिल्म में भारतीय जासूस ‘हम्ज़ा’ के किरदार के लिए जो शारीरिक मेहनत की है, वह पर्दे पर साफ नजर आती है। लेकिन फिल्म की असली जान इसके वे 5 मुख्य एक्शन सीक्वेंस हैं, जिनकी चर्चा आज हर फिल्म समीक्षक कर रहा है। आइए, इन दृश्यों का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
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→ पूरा लेख पढ़ें1. इस्तांबुल की छतों पर ‘सिंगल-टेक’ चेज सीक्वेंस
फिल्म की शुरुआत ही धमाके के साथ होती है। इस्तांबुल की संकरी गलियों और ऐतिहासिक इमारतों की छतों पर फिल्माया गया यह पीछा करने वाला सीन करीब 7 मिनट लंबा है।
विशेषता: इस सीन की सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘सिनेमैटोग्राफी’ है। इसे इस तरह फिल्माया गया है कि यह एक ‘सिंगल शॉट’ या ‘लॉन्ग टेक’ जैसा महसूस होता है। जब रणवीर सिंह एक छत से दूसरी छत पर छलांग लगाते हैं, तो कैमरा उनके साथ हवा में तैरता हुआ प्रतीत होता है। इसमें ‘पार्कर’ (Parkour) तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया गया है। दर्शकों के लिए यह दृश्य इसलिए रोंगटे खड़े करने वाला है क्योंकि इसमें कोई कृत्रिमता नहीं लगती; रणवीर की सांसों की आवाज और भागने की आहट दर्शकों को उस खतरे का अहसास कराती है।
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→ पूरा लेख पढ़ें2. ‘स्टेल्थ मिशन’: खामोशी में छिपा मौत का साया
आदित्य धर ने ‘उरी’ में अपनी काबिलियत साबित की थी कि वे रात के ऑपरेशन्स को कितनी बारीकी से दिखा सकते हैं। ‘धुरंधर’ में एक दृश्य है जहाँ हम्ज़ा को एक सुरक्षित किले (Safe House) में घुसकर जानकारी निकालनी होती है।
विशेषता: यहाँ कोई गोलियां नहीं चलतीं, कोई धमाका नहीं होता। पूरा सीन ‘पिन-ड्रॉप साइलेंस’ में चलता है। यहाँ हम्ज़ा की ‘हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट’ और ‘नाइफ फाइटिंग’ (चाकू से लड़ाई) की कला दिखाई गई है। अंधेरे में थर्मल विजन कैमरों का उपयोग और दुश्मनों को एक-एक कर खामोशी से ढेर करना, दर्शकों को ‘मिशन इम्पॉसिबल’ या ‘जीरो डार्क थर्टी’ की याद दिलाता है। यह सीन साबित करता है कि एक्शन केवल शोर-शराबे का नाम नहीं, बल्कि सस्पेंस का भी है।
3. द हाईवे एम्बुश: जब आमने-सामने हुए दो दिग्गज
फिल्म का इंटरवल पॉइंट एक हाई-स्पीड हाईवे चेज पर खत्म होता है। यह वह दृश्य है जहाँ पहली बार फिल्म का मुख्य नायक (रणवीर) और मुख्य विलेन (संजय दत्त) एक ही फ्रेम के करीब आते हैं।
विशेषता: इस सीन में भारी मात्रा में वीएफएक्स (VFX) और प्रैक्टिकल इफेक्ट्स का मिश्रण है। गाड़ियों का पलटना, आरपीजी (RPG) लॉन्चर से होता धमाका और उड़ती हुई गाड़ियों के बीच से अपनी बाइक निकालते रणवीर सिंह—यह सब कुछ बेहद भव्य है। संजय दत्त का केवल एक लुक और उनकी आँखों से निकलने वाला खौफ इस एक्शन सीन को इमोशनल वेट (Emotional Weight) भी देता है। यह भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे फिल्माए गए एम्बुश सीन्स में से एक है।
4. रेगिस्तान की जंग: धूल और बारूद का तांडव
फिल्म के दूसरे भाग में एक बड़ा युद्ध सीक्वेंस है जिसे जैसलमेर के रेगिस्तान में शूट किया गया है। यह सीन लगभग 15 मिनट लंबा है और इसमें भारतीय सेना की टैक्टिकल यूनिट्स का उपयोग दिखाया गया है।
विशेषता: धूल के गुबार (Dust Storm) के बीच लड़ाई करना किसी भी फिल्म मेकर के लिए चुनौती होती है। यहाँ सिनेमैटोग्राफर ने ‘नेचुरल लाइट’ और ‘ग्रेन टेक्सचर’ का इस्तेमाल किया है जो इसे एक डॉक्यूमेंट्री जैसा फील देता है। जब टैंक और हेलिकॉप्टर एक साथ स्क्रीन पर आते हैं, तो थिएटर का साउंड सिस्टम कांप उठता है। रणवीर सिंह को एक स्नाइपर राइफल के साथ लंबी दूरी से निशाना साधते देखना दर्शकों के लिए एक नया अनुभव था।
5. द रॉ क्लाइमेक्स: बिना हथियार की जंग
जहाँ अधिकांश फिल्में बड़े धमाके के साथ खत्म होती हैं, वहीं ‘धुरंधर’ का क्लाइमेक्स बहुत ही ‘पर्सनल’ और ‘रॉ’ रखा गया है। यह लड़ाई एक बंद गोदाम में होती है।
विशेषता: यहाँ कोई बंदूक नहीं है, कोई गैजेट नहीं है। यहाँ केवल दो इंसान हैं जो एक-दूसरे को मार गिराने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। इस फाइट को ‘ब्रूटल’ (Brutal) कैटेगरी में रखा जा सकता है। खून, पसीना और टूटती हुई हड्डियों की आवाजें इसे बहुत यथार्थवादी बनाती हैं। रणवीर सिंह की बॉडी लैंग्वेज यहाँ एक घायल शेर जैसी है। यह सीन दर्शकों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका देने वाला है, जो एक बेहतरीन एक्शन फिल्म की पहचान होती है।
क्यों ‘धुरंधर’ का एक्शन अन्य फिल्मों से अलग है?
फिल्म की सफलता का राज इसकी ‘प्रैक्टिकल अप्रोच’ में है। आदित्य धर ने एक्टर्स को हफ्तों तक मिलिट्री ट्रेनिंग दी, ताकि वे हथियार पकड़ने और चलने के तरीके में पेशेवर लगें। साथ ही, फिल्म में ‘ग्रेविटी’ का सम्मान किया गया है—यानी कोई भी ऐसा स्टंट नहीं है जो असंभव लगे। यही कारण है कि ‘धुरंधर’ न केवल एक हिट फिल्म है, बल्कि एक्शन प्रेमियों के लिए एक ‘केस स्टडी’ भी बन गई ह
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