दिसंबर की ठंडक और क्रिसमस की घंटियों के बीच, उपहारों का आदान-प्रदान इस त्योहार की आत्मा है। लेकिन इस उत्साह के पीछे एक कड़वा सच छिपा है—कचरा। शोध के अनुसार, उत्सवों के दौरान लैंडफिल (कचरे के ढेर) में 25-30% की वृद्धि होती है, जिसका एक बड़ा हिस्सा सजावटी कागज, प्लास्टिक रिबन और ऐसे उपहार होते हैं जो कभी इस्तेमाल नहीं किए जाते।
2025 में, ‘सस्टेनेबल लिविंग’ अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। आइए समझते हैं कि हम कैसे एक ‘जीरो-वेस्ट क्रिसमस’ की नींव रख सकते हैं।
1. रैपिंग पेपर का संकट और ‘फुरोशिकी’ का जादू
ज्यादातर कमर्शियल रैपिंग पेपर प्लास्टिक-कोटेड या ग्लिटर वाले होते हैं, जिन्हें रीसायकल करना असंभव है। यहाँ ‘मिनिमलिज्म’ और पुरानी परंपराओं का मेल काम आता है।
- फुरोशिकी (Furoshiki): यह उपहारों को कपड़े में लपेटने की एक प्राचीन जापानी कला है। आप एक सुंदर सूती दुपट्टे, पुराने स्कार्फ या जूट के कपड़े का उपयोग कर सकते हैं। यह पैकेजिंग अपने आप में एक दूसरा उपहार बन जाती है जिसे प्राप्तकर्ता दोबारा इस्तेमाल कर सकता है।
- प्राकृतिक तत्व: प्लास्टिक रिबन और टेप के बजाय, जूट की रस्सी (Twine) और सूखे फूलों, देवदार की पत्तियों (Pine needles) या दालचीनी की स्टिक का उपयोग करें। यह न केवल देखने में ‘एस्थेटिक’ लगता है, बल्कि पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है।
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→ पूरा लेख पढ़ें2. अर्थपूर्ण उपहार: वस्तुओं से परे (Experiences over Objects)
क्या आपने कभी गौर किया है कि कितने उपहार साल भर अलमारी के किसी कोने में पड़े रहते हैं? ‘इको-फ्रेंडली’ होने का सबसे अच्छा तरीका है—कम खरीदना (Buy Less)।
- अनुभवों का उपहार: भौतिक वस्तुओं के बजाय किसी वर्कशॉप का टिकट, म्यूजियम पास, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या किसी पसंदीदा रेस्टोरेंट का वाउचर दें। इनका कार्बन फुटप्रिंट शून्य के बराबर होता है।
- हस्तनिर्मित प्रेम: अपने हाथों से बनाए गए जैविक साबुन, घर का बना जैम या हाथ से बुने हुए मोजे। शोध बताते हैं कि हस्तनिर्मित उपहारों का भावनात्मक मूल्य बाजार से खरीदी गई वस्तुओं से कहीं अधिक होता है।
3. ‘स्थानीय और जैविक’ का चयन (Vocal for Local)
भारत में हमारे आसपास ऐसे कई कारीगर हैं जो पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाते हैं। इस क्रिसमस, अमेज़न या बड़ी कंपनियों के बजाय स्थानीय बाजारों की ओर रुख करें।
- मिट्टी और बांस के उत्पाद: उत्तर प्रदेश के खुर्जा की क्रॉकरी या पूर्वोत्तर भारत के बांस से बने सजावटी सामान बेहतरीन उपहार विकल्प हैं।
- प्लांट-बेस्ड उपहार: एक छोटा सा ‘स्नेक प्लांट’ या ‘तुलसी’ का पौधा एक ऐसा उपहार है जो सालों तक प्राप्तकर्ता के घर में ऑक्सीजन और सकारात्मकता बढ़ाएगा।
4. डिजिटल उपहार और ई-कार्ड्स का चलन
2025 का युग डिजिटल क्रांति का है। कागजी कार्ड्स की छपाई और उनके परिवहन में होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘ई-कार्ड्स’ या वीडियो संदेश एक बेहतरीन विकल्प हैं। यह न केवल त्वरित (instant) है, बल्कि कागज की बचत भी करता है।
5. उत्सव के बाद का प्रबंधन: रिसाइकिलिंग की आदत
यदि आपको उपहार मिले हैं, तो उनके रैपिंग पेपर और बॉक्स को सावधानी से खोलें। इन्हें फेंकने के बजाय अगले साल के लिए सुरक्षित रखें। ‘कंज्यूमरिज्म’ के इस चक्र को तोड़ने के लिए हमें ‘Reuse, Reduce, Recycle‘ के मंत्र को अपने त्यौहार का हिस्सा बनाना होगा।
निष्कर्ष: एक सचेत शुरुआत
क्रिसमस प्यार और करुणा का त्योहार है। और करुणा केवल इंसानों के लिए नहीं, बल्कि उस धरती के लिए भी होनी चाहिए जो हमें जीवन देती है। इस बार जब आप सांता क्लॉज की तरह उपहार बांटें, तो सुनिश्चित करें कि आपकी खुशियों की पोटली में प्रकृति के लिए कोई नुकसान न हो।
याद रखें: सबसे अच्छा उपहार एक सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य है।
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