क्रिसमस का मौसम आते ही हवा में मसालों और बेकिंग की खुशबू घुल जाती है। दुनिया भर में प्लम केक, जिंजरब्रेड और पुडिंग जैसे व्यंजन इस त्योहार का अभिन्न अंग बन जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन वैश्विक क्रिसमस व्यंजनों का स्वाद और सुगंध भारत के बिना अधूरा है?
यह लेख आपको एक ऐसी पाक-यात्रा पर ले जाएगा, जहाँ हम खोजेंगे कि कैसे भारतीय मसालों ने वैश्विक क्रिसमस गैस्ट्रोनॉमी को आकार दिया और कैसे केरल के एक छोटे से शहर में बना भारत का पहला क्रिसमस केक इस परंपरा का प्रतीक बन गया।
मसालों का स्वर्ण युग: जब भारतीय जायके ने यूरोप को मोहित किया
मध्य युग और पुनर्जागरण काल (Middle Ages and Renaissance) में यूरोप के लिए मसाले केवल स्वाद बढ़ाने वाले घटक नहीं थे; वे धन, प्रतिष्ठा और संरक्षण का प्रतीक थे। काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, जायफल और अदरक—ये सभी “मसालों के राजा” केरल के मालाबार तट से अरब और फिर यूरोपीय व्यापारियों के माध्यम से दुनिया भर में पहुँचते थे।
- पुडिंग और केक में मसाले: यूरोपीय देशों में क्रिसमस के दौरान बनने वाले प्लम पुडिंग और केक में इन भारतीय मसालों का जमकर इस्तेमाल होता था। ये न केवल स्वाद बढ़ाते थे, बल्कि ठंडी जलवायु में भोजन को संरक्षित करने में भी मदद करते थे। दालचीनी और लौंग की वह विशिष्ट सुगंध जिसे आज हम ‘क्रिसमस की खुशबू’ कहते हैं, वास्तव में भारतीय मसाला बागानों की देन है।
- दवा से दावत तक: शुरुआत में कई मसालों का उपयोग औषधीय गुणों के लिए भी किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे वे त्योहारों की दावतों का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए।
अवश्य पढ़ें
भारत में ईसाइयत का इतिहास और क्रिसमस
भारत में ईसाइयत के आगमन, विकास और क्रिसमस के सांस्कृतिक महत्व को विस्तारपूर्वक समझें — इतिहास एवं परंपरा।
→ पूरा लेख पढ़ेंभारत के पहले क्रिसमस केक की कहानी: थालास्सेरी, 1883
क्रिसमस केक (Plum Cake) भारतीय क्रिसमस का एक अभिन्न अंग है, लेकिन इसकी शुरुआत कहाँ से हुई? यह कहानी बेहद दिलचस्प है और हमें 1883 में केरल के थालास्सेरी (Thalassery) शहर ले जाती है।
- मंपल्ली बापू (Mampally Bapu): थालास्सेरी में ‘मंपल्ली बेकरी’ चलाने वाले श्री मंपल्ली बापू को भारत का पहला क्रिसमस केक बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्हें एक स्थानीय प्लांटर, मिस्टर मर्डोक ब्राउन, ने एक ब्रिटिश प्लम केक का ऑर्डर दिया था।
- भारतीय फ्यूजन: मंपल्ली बापू के पास ओवन नहीं था, और यूरोपीय शराब भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने अपने कौशल का उपयोग करते हुए, स्थानीय काजू, ताड़ के गुड़, और केरल के प्रसिद्ध मसाले (दालचीनी, लौंग, जायफल, इलायची) का उपयोग किया। उन्होंने अपने नारियल की ताड़ी से शराब बनाई और इसे बेक करने के लिए एक विशेष ‘फर्नेस’ का निर्माण किया। इस प्रकार, पहला ‘भारतीय क्रिसमस केक’ जन्मा, जो विदेशी रेसिपी का एक देसी रूपांतरण था।
यह केक न केवल मिस्टर ब्राउन को पसंद आया, बल्कि इसने पूरे भारत में क्रिसमस केक की एक नई परंपरा की शुरुआत की।
गोवा का बेबिंका: एक पुर्तगाली-भारतीय कृति

गोवा में क्रिसमस का जश्न बिना बेबिंका (Bebinca) के अधूरा है। यह एक बहुस्तरीय (multi-layered) केक है, जिसे अक्सर “गोवा की रानी” कहा जाता है।
- पुर्तगाली विरासत: बेबिंका पुर्तगाली उपनिवेशवाद की देन है, लेकिन इसे भारतीय सामग्री और स्वाद के साथ पूरी तरह से अनुकूलित किया गया है। नारियल का दूध, अंडे की जर्दी, आटा और ढेर सारी चीनी—इन सभी को धीमे-धीमे बेक करके हर परत को भूरा होने तक पकाया जाता है।
- कला और धैर्य: बेबिंका बनाना एक कला है जिसमें बहुत धैर्य और कौशल की आवश्यकता होती है। इसकी हर परत को अलग से बेक किया जाता है, जिससे यह एक अनोखा स्वाद और बनावट प्राप्त करता है। यह गोवा के क्रिसमस का सबसे प्रतिष्ठित व्यंजन बन चुका है।
अन्य भारतीय क्रिसमस व्यंजन: क्षेत्रीय विविधता
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में क्रिसमस के दौरान स्थानीय व्यंजनों में भी भारतीय तड़का देखने को मिलता है:
- केरल में अप्पम और स्टू: क्रिसमस की सुबह इडली या डोसे की तरह का अप्पम (चावल का पैनकेक) और नारियल के दूध में पका मटन या चिकन स्टू एक पारंपरिक व्यंजन है।
- पूर्वोत्तर भारत में स्थानीय व्यंजन: नागालैंड या मिजोरम में, पोर्क करी और स्थानीय रूप से उगाए गए चावल के साथ क्रिसमस मनाया जाता है, जो स्थानीय कृषि और स्वाद को दर्शाता है।
- पूरे भारत में बिरयानी: कई भारतीय ईसाई घरों में, क्रिसमस की दावत में पारंपरिक बिरयानी भी शामिल होती है, जो भारतीय उत्सवों का एक अनिवार्य हिस्सा है।
निष्कर्ष: भारतीय स्वाद का वैश्विक प्रभुत्व
क्रिसमस गैस्ट्रोनॉमी की कहानी सिर्फ व्यंजनों की नहीं, बल्कि संस्कृतियों के मेल और आदान-प्रदान की कहानी है। भारतीय मसालों ने सदियों पहले यूरोप के क्रिसमस व्यंजनों को समृद्ध किया, और फिर भारत ने खुद अपने अनूठे ‘प्लम केक’ और ‘बेबिंका’ जैसे व्यंजनों से इस त्योहार को अपना बनाया।
यह दर्शाता है कि भारत हमेशा से ही ‘वैश्विक स्वाद’ का उद्गम स्थल रहा है। इस क्रिसमस, जब आप एक प्लम केक का टुकड़ा खाएं या बेबिंका का स्वाद लें, तो उस लंबी पाक-यात्रा को याद करें जिसने इन व्यंजनों को आप तक पहुँचाया है—और उस जादू को भी, जिसे भारतीय मसालों ने दुनिया भर में फैलाया है।
अवश्य पढ़ें
क्रिसमस Zero Waste Gifting Guide
क्रिसमस के लिए पर्यावरण-अनुकूल, Zero Waste गिफ्टिंग आइडियाज़ — टिकाऊ, सुंदर और अर्थपूर्ण उपहारों की विस्तृत मार्गदर्शिका।
→ पूरा लेख पढ़ें




