बांग्लादेश में क्या हो रहा है और हिंदू युवक की सार्वजनिक लिंचिंग पर क्यों कोई चर्चा नहीं कर रहा?

बांग्लादेश में क्या हो रहा है और हिंदू युवक की सार्वजनिक लिंचिंग पर क्यों कोई चर्चा नहीं कर रहा?

बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल और सामुदायिक तनाव की चपेट में है। दिसंबर 2025 के मध्य में देश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी, जब पिछले साल की छात्र क्रांति के प्रमुख नेता शरीफ ओसमान हादी की मौत हो गई। हादी की गोली लगने से मौत ने पूरे देश में प्रदर्शनों को जन्म दिया, जो जल्दी ही हिंसक हो गए। ढाका में प्रमुख अखबारों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया, सांस्कृतिक संस्थानों पर हमले हुए और कई जगहों पर तोड़फोड़ हुई।

इस अराजकता के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना घटी – मयमनसिंह जिले में एक 25-27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और उसके शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। आरोप था कि उसने इस्लाम या पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी की थी, लेकिन जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला

यह घटना कोई अकेली नहीं है। शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद से (अगस्त 2024) बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं। हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल जैसे संगठनों के अनुसार, 2024-2025 में सैकड़ों मंदिरों पर हमले, घरों में आगजनी और लक्षित हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं।

हिंदू आबादी, जो कभी 20-30% थी, अब 8% से कम रह गई है – इसका एक बड़ा कारण लगातार उत्पीड़न और पलायन है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने इस लिंचिंग की निंदा की और 10-12 आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन कई लोग इसे “अलग-थलग घटना” बताकर खारिज कर रहे हैं। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ये हमले राजनीतिक हैं, क्योंकि हिंदू अक्सर अवामी लीग (हसीना की पार्टी) के समर्थक माने जाते हैं, न कि पूरी तरह धार्मिक।

फिर भी, दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या – जहां उसे फैक्ट्री से खींचकर बाहर निकाला गया, पीटा गया, पेड़ से लटकाया गया और जिंदा जलाया गया – ने भारत में गुस्सा भड़का दिया। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने इसे हिंदू विरोधी हिंसा बताया, जबकि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे “चिंताजनक” कहा। भारत सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई, लेकिन बांग्लादेश ने इसे “अलग मामला” बताकर खारिज कर दिया।

अवश्य पढ़ें

बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दू आबादी में गिरावट

बांग्लादेश एवं पाकिस्तान में हिन्दू आबादी में गिरावट

बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दू समुदाय की आबादी घटने के कारण, तथ्यों और पीछे के कारणों को विस्तार से जानें।

→ पूरा लेख पढ़ें

अब सवाल यह है: इस घटना पर इतनी चुप्पी क्यों?

  1. अंतरराष्ट्रीय मीडिया की अनदेखी: पश्चिमी मीडिया (बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, अल जजीरा) ने बांग्लादेश की हिंसा को कवर किया, लेकिन हिंदू युवक की लिंचिंग को मुख्य रूप से “अराजकता का हिस्सा” बताया। वे मीडिया हाउसों पर हमलों या छात्र नेता की मौत पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में इसे “इसोलेटेड इंसिडेंट” कहा गया। कारण? हिंदू उत्पीड़न की खबरें अक्सर “भारतीय प्रोपेगैंडा” के रूप में देखी जाती हैं, क्योंकि भारत में हिंदू राष्ट्रवादी सरकार इसे उठाती है। पश्चिमी मीडिया मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर हमलों को ज्यादा कवर करता है, जबकि हिंदू पीड़ितों को कम प्राथमिकता मिलती है।
  2. राजनीतिक संवेदनशीलता: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार यूनुस की है, जो नोबेल विजेता हैं। उनकी आलोचना करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय हिचकिचाता है। साथ ही, हसीना की सरकार गिरने को “लोकतंत्र की जीत” बताया गया था, इसलिए वहां की अराजकता को कम करके आंका जाता है। अगर हिंदू हमलों को बड़ा बनाया जाए, तो यह “इस्लामोफोबिया” या “भारत समर्थित प्रोपेगैंडा” कहलाएगा।
  3. भारतीय मीडिया vs वैश्विक मीडिया: भारत में यह खबर प्रमुखता से चली – द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया ने विस्तार से रिपोर्ट किया। लेकिन वैश्विक मीडिया में यह “भारत-बांग्लादेश तनाव” का हिस्सा बनकर रह गई। कुछ फैक्ट-चेकर्स ने पहले की घटनाओं में भारतीय मीडिया पर “अतिरंजना” का आरोप लगाया, जिससे अब वैश्विक स्तर पर संदेह पैदा होता है।
  4. सोशल मीडिया और प्रोपेगैंडा: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, लेकिन कुछ पुराने या गलत संदर्भ वाले भी थे। इससे असली घटनाएं भी संदेह के घेरे में आ जाती हैं।

निष्कर्ष: चुप्पी का मतलब न्याय से इनकार नहीं

दीपू चंद्र दास की हत्या एक युवक की जिंदगी का अंत है, जो बिना सबूत के आरोप में मारा गया। यह बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ और कानून-व्यवस्था की कमजोरी का संकेत है। अंतरिम सरकार ने गिरफ्तारियां कीं और निंदा की, जो सकारात्मक है, लेकिन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। दुनिया को इस पर बोलना चाहिए, क्योंकि मानवाधिकार सबके लिए हैं – चाहे पीड़ित हिंदू हो या कोई और। अगर हम चुप रहें, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। बांग्लादेश को “नया बांग्लादेश” बनाने का दावा है, तो उसे सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कट्टरता किसी भी समाज को खोखला कर देती है। उम्मीद है कि न्याय होगा और शांति बहाल होगी।

अवश्य पढ़ें

छिपे हुए सरकारी राज़ — पूरी सच्चाई

छिपे हुए सरकारी राज़ — पूरी सच्चाई

वो सरकारी सच जिन्हें कभी सामने नहीं आने दिया गया — दस्तावेज़, संकेत और दबाई गई सच्चाई हिंदी में।

→ पूरा लेख पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *