अनोखा तोहफा
शहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने बंगले में ‘दादाजी’ अकेले रहते थे। मोहल्ले के बच्चे उन्हें ‘जादूगर‘ कहते थे, क्योंकि उनके पास हर समस्या का हल होता था।
एक दिन, 10 साल का आर्यन उनके पास दौड़ता हुआ आया। वह बहुत उदास था। उसने कहा, “दादाजी, स्कूल में सब मेरा मजाक उड़ाते हैं क्योंकि मेरे पास महंगे खिलौने नहीं हैं। क्या गरीब होना इतनी बुरी बात है?”
दादाजी मुस्कुराए और अंदर से एक पुराना, धूल से भरा लकड़ी का बक्सा निकाल लाए। उन्होंने बड़े ध्यान से उसे खोला, लेकिन उसके अंदर कुछ नहीं था! वह खाली था।
आर्यन चौंक गया, “दादाजी, इसमें तो कुछ भी नहीं है!”
दादाजी ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा, “आर्यन, ध्यान से देखो। इसमें ‘कल का सपना’ है। लोग सिर्फ वही देखते हैं जो बाहर दिखता है, लेकिन असली कीमती चीज़ें दिल के अंदर और इरादों में होती हैं।”
उन्होंने आर्यन को एक छोटा सा बीज दिया और कहा, “इस खाली डिब्बे में मिट्टी भरो और इस बीज को लगाओ। इसकी देखभाल करो। जब यह पौधा बनेगा, तब तुम्हें समझ आएगा कि सबसे कीमती चीज़ खरीदी नहीं, बल्कि कमाई जाती है।”
सालों बाद…
आर्यन आज शहर का सबसे बड़ा पर्यावरणविद् (Environmentalist) है। उसके पास आज महंगे खिलौने तो नहीं, लेकिन करोड़ों लोगों का प्यार और हज़ारों पेड़ हैं। उसने समझ लिया था कि इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं, उसके जुनून और कर्मों से होती है।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
- आत्मविश्वास: आपकी वैल्यू आपके पास मौजूद सामान से नहीं, आपकी काबिलियत से है।
- धैर्य: अच्छी चीज़ें समय लेती हैं, जैसे बीज से पेड़ बनने में समय लगता है।
- दृष्टिकोण: दुनिया को देखने का नज़रिया बदलिए, दुनिया अपने आप बदल जाएगी।
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