शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि और उल्लास का प्रतीक है। इन नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यदि आप भी इस नवरात्रि मां दुर्गा की विशेष कृपा, आरोग्य और सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो इन नौ दिनों के दौरान आपको ये 10 महत्वपूर्ण काम अवश्य करने चाहिए।
1. विधि-विधान से घटस्थापना (कलश स्थापना) करें
नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में ही घटस्थापना करें। मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं और उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश में आम या अशोक के पत्ते और सुपारी रखकर नारियल स्थापित करना मां दुर्गा के स्वागत का मुख्य चरण है।
2. अखंड ज्योति प्रज्वलित करें
यदि संभव हो तो अपनी सामर्थ्य और सुविधा के अनुसार पूजा गृह में नौ दिनों के लिए शुद्ध घी या तिल के तेल की अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। अखंड ज्योति जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
शारदीय नवरात्रि 2026: कब है कलश स्थापना और सही मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हो रही है? कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और घटस्थापना की सही विधि जानिए…
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शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से उपासना की जाती है। इस लेख में जानिए कलश स्थापना का शुभ समय, घटस्थापना विधि और पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।
3. माता को नौ दिनों तक प्रिय भोग लगाएं
माता रानी के हर दिन के स्वरूप के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाएं। जैसे प्रथम दिन शैलपुत्री को गाय के घी का भोग, ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग, और इसी तरह नौ दिनों तक अलग-अलग नैवेद्य अर्पित करें। इससे माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
4. दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ करें
नवरात्रि के इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आप पूरा पाठ रोजाना नहीं कर पा रहे हैं, तो कम से कम इसके कुछ अध्यायों या कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र का पाठ जरूर करें।
5. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन करें
नवरात्रि का सबसे मुख्य अनुष्ठान कन्या पूजन माना जाता है। अष्टमी या नवमी के दिन दो से दस वर्ष की नौ कन्याओं और एक बटुक (भैरव रूप) को अपने घर आदरपूर्वक आमंत्रित करें। उनके चरण धोकर उन्हें भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार व दक्षिणा दें।
6. सात्विक आहार और उपवास का पालन करें
इन नौ दिनों में पूरी तरह सात्विक जीवनशैली अपनाएं। यदि आप व्रत रख रहे हैं तो फलाहार करें, और यदि व्रत नहीं भी हैं तब भी घर की रसोई में लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का प्रयोग पूरी तरह बंद रखें। मन और शरीर दोनों से पवित्रता बनाए रखें।
7. घर की साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान रखें
माता रानी का वास वहीं होता है जहां साफ-सफाई और स्वच्छता होती है। नवरात्रि शुरू होने से पहले ही पूरे घर की अच्छी तरह सफाई कर लें और पूजा स्थान को फूलों तथा रंगोली से सजाएं। घर के मुख्य द्वार पर रोज सुबह हल्दी या सिंदूर से शुभ चिह्न बनाएं।
8. माता को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें
माँ दुर्गा को लाल रंग अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान माता को लाल गुलाब, गुड़हल या कमल के फूल अर्पित करें। इसके अलावा लाल रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना और माता को चुनरी चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।
9. संध्या आरती और मंत्र जाप करें
सुबह की पूजा के साथ-साथ शाम के समय भी विधि-विधान से दीपक जलाकर आरती करें। आरती के समय कपूर का प्रयोग जरूर करें। इसके अलावा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै” मंत्र का नियमित रूप से रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
10. क्षमा प्रार्थना और हवन के साथ समापन करें
नवमी के दिन हवन करने के बाद दशमी को व्रत का पारण करें। पूजा के अंत में माता रानी से अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी के कल्याण की कामना करें। जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करके अपने अनुष्ठान को पूर्ण करें।
विशेष टिप: नवरात्रि के दौरान किसी भी सुहागन स्त्री, कन्या या बुजुर्ग का अपमान न करें। ऐसा करने से मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं, क्योंकि हर स्त्री में किसी न किसी रूप में शक्ति का ही वास होता है।
क्या आपने इस बार नवरात्रि में इनमें से कौन से विशेष अनुष्ठान करने की तैयारी की है?




