“अगर तुम यह खत पढ़ रहे हो कबीर… तो इसका मतलब है कि मैं इस दुनिया से बहुत दूर जा चुकी हूँ। मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना, क्योंकि तुम जहाँ हो, वहाँ से मुझ तक कोई नहीं पहुँच सकता।”
कबीर के हाथों से चाय का कप छूटकर फर्श पर गिर गया। गर्म चाय और कांच के टुकड़े बिखर गए, लेकिन कबीर को जैसे कोई होश नहीं था। उसकी आँखें मीरा की उस डायरी के आखिरी पन्ने पर टिकी थीं, जो उसे मीरा के अचानक गायब होने के तीन दिन बाद उसके अलमारी के एक गुप्त दराज से मिली थी।
जब दो अजनबी मिले
कबीर और मीरा की मुलाकात एक साल पहले शिमला की एक शांत लाइब्रेरी में हुई थी। कबीर एक मशहूर आर्किटेक्ट था और मीरा एक फ्रीलांस पेंटर। मीरा की आँखों में एक अजीब सा सूनापन था, जो कबीर को उसकी ओर खींच ले गया।
दोनों में बातें हुईं, मुलाकातें बढ़ीं, और धीरे-धीरे यह दोस्ती एक गहरे प्यार में बदल गई। मीरा कबीर के साथ हंसती थी, घूमती थी, लेकिन कबीर ने हमेशा महसूस किया कि मीरा का एक हिस्सा कहीं और था। वह अक्सर खिड़की के बाहर देखते हुए किसी गहरी सोच में डूब जाती थी। जब भी कबीर उसके अतीत के बारे में पूछता, वह बात टाल देती, “कबीर, मेरा आज सिर्फ तुम्हारा है। बीते हुए कल को कब्र में ही रहने दो।”
कबीर ने उसकी खामोशी को उसका सम्मान समझा और कभी ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया। दोनों अगले महीने शादी करने वाले थे। लेकिन फिर वो रात आई…
द नाईट ऑफ हार्टब्रेक (वह खौफनाक रात)
शादी से ठीक दो हफ्ते पहले, कबीर ने अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी। कबीर के बचपन का दोस्त, रोहन, जो कि एक पुलिस इनवेस्टिगेटर था, वह भी उस रात आया था।
पार्टी में जैसे ही रोहन ने मीरा को देखा, उसके चेहरे का रंग उड़ गया। मीरा ने भी जब रोहन को देखा, तो उसके हाथ से वाइन का ग्लास गिर पड़ा। उसने खुद को संभाला और सिरदर्द का बहाना बनाकर तुरंत अपने कमरे में चली गई।
कबीर ने रोहन से पूछा, “क्या बात है रोहन? तुम मीरा को ऐसे क्यों देख रहे थे?”
रोहन ने कबीर को एक कोने में ले जाकर फुसफुसाते हुए कहा, “कबीर… तुम इस लड़की को कब से जानते हो? यह मीरा नहीं है। इसका असली नाम अवनी है… और यह तीन साल पहले शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन ‘अमित मेहरा’ की मौत के केस में मुख्य संदिग्ध (Primary Suspect) थी! पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह जेल से फरार है!”
कबीर के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह रोहन की बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था। वह मीरा से बात करने के लिए ऊपर कमरे की तरफ भागा, लेकिन कमरा अंदर से बंद था। जब कबीर ने पैरेंट्स और रोहन की मदद से दरवाज़ा तोड़ा… तो कमरा खाली था। खिड़की खुली थी और मीरा गायब हो चुकी थी।
सस्पेंस का खुलासा: डायरी का आखिरी सच
अब, तीन दिन बाद कबीर के हाथ में मीरा की वो डायरी थी। कबीर ने कांपते हाथों से डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए। उसमें जो लिखा था, उसने कबीर के दिल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए, लेकिन साथ ही एक ऐसा सस्पेंस खोला जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
डायरी में मीरा (अवनी) ने लिखा था:
“कबीर, रोहन ने जो कहा वो सच है। मैं पुलिस की नज़र में एक मुजरिम हूँ। लेकिन पूरा सच कोई नहीं जानता। अमित मेहरा मेरा पति था… एक ऐसा इंसान जो बंद दरवाज़ों के पीछे एक शैतान था। वह मुझे रोज़ प्रताड़ित करता था। उस रात, उसने हद पार कर दी। अपनी जान बचाने के लिए, मैंने आत्मरक्षा (Self Defense) में उस पर हाथ उठाया… और वह गिर गया। उसकी मौत हो गई।
मैं कानून से डरकर भाग गई। मैंने अपना नाम बदला, अपना चेहरा छुपाया। लेकिन जब मैं तुमसे मिली, मुझे पहली बार ज़िंदगी से प्यार हुआ। कबीर, मेरा प्यार झूठा नहीं था। मैं तुम्हारे साथ एक नई ज़िंदगी जीना चाहती थी।”
खत के आखिरी हिस्से में लिखा था:
“लेकिन कानून अंधा होता है कबीर। रोहन मुझे छोड़ता नहीं, और मैं तुम्हें एक भगोड़ी का पति नहीं बनने दे सकती थी। मैं अपनी मर्जी से खुद को पुलिस के हवाले करने जा रही हूँ। अगर मेरा प्यार सच्चा होगा, तो मैं अपनी सज़ा काटकर तुम्हारे पास वापस आऊँगी। तब तक… मुझे भूल जाना।”
क्लाइमेक्स
कबीर की आँखों से आँसू बह रहे थे। उसका दिल टूट चुका था, लेकिन उसका प्यार अब और गहरा हो गया था। उसने अपनी जैकेट उठाई और रोहन को फोन मिलाया।
“रोहन… मुझे मीरा का सच पता चल गया है। वह भाग नहीं रही है, वह कोर्ट की तरफ गई है। और इस बार, उसका केस लड़ने के लिए शहर का सबसे बड़ा वकील मैं खड़ा करूँगा। क्योंकि उसने जो किया, वो जुर्म नहीं, खुद को बचाना था।”
कबीर अपनी गाड़ी की तरफ भागा। उसकी सस्पेंस से भरी प्रेम कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी… इसकी शुरुआत अब होने वाली थी।




