भारत के सांस्कृतिक मानचित्र पर होली का त्योहार एक विशेष स्थान रखता है। यह केवल रंगों की फुहार नहीं, बल्कि हमारी रसोई से उठने वाली उन सुगंधित खुशबुओं का भी पर्व है, जो पीढ़ियों से हमारी रोचक परंपराओं का हिस्सा रही हैं। बिना विशेष पकवानों के होली की कल्पना करना अधूरा है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे होली के पकवान इस उत्सव को एक विशेष और रोचक मोड़ देते हैं।
1. गुझिया: होली का सबसे विशेष पकवान
होली की चर्चा हो और गुझिया का नाम न आए, यह असंभव है। गुझिया इस त्योहार का सबसे विशेष और प्रतिष्ठित व्यंजन है। मैदा की पतली परत के अंदर खोया (मावा), सूजी, सूखे मेवे और इलायची का जो मिश्रण भरा जाता है, वह स्वाद का एक विशेष अनुभव प्रदान करता है।
रोचक बात यह है कि भारत के अलग-अलग प्रांतों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन इसका विशेष महत्व हर जगह एक समान है। गुझिया बनाना एक रोचक पारिवारिक गतिविधि भी है, जहाँ घर की महिलाएँ मिलकर इसे तैयार करती हैं, जो आपसी प्रेम को दर्शाता है।
2. ठंडाई: एक रोचक और ऊर्जावान पेय
होली के हुड़दंग और नाच-गाने के बीच शरीर को ठंडक पहुँचाने के लिए ठंडाई का एक विशेष स्थान है। दूध, बादाम, पिस्ता, केसर, सौंफ और काली मिर्च के मिश्रण से तैयार यह पेय न केवल स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि बेहद रोचक भी है।
होली पर ठंडाई के साथ भांग का मिश्रण एक विशेष परंपरा मानी जाती है, जिसे भगवान शिव के प्रसाद के रूप में देखा जाता है। यह रोचक रिवाज लोगों को मस्ती के रंग में सराबोर कर देता है। बिना इस विशेष ठंडाई के होली की महफ़िल अधूरी मानी जाती है।
3. दही-भल्ले और कांजी-वड़ा: चटपटा स्वाद
मीठे पकवानों के साथ कुछ नमकीन और चटपटा होना भी विशेष रूप से जरूरी है। दही-भल्ले अपनी कोमलता और ठंडी दही के साथ होली की दोपहर को रोचक बना देते हैं। इमली की चटनी और जीरा पाउडर का विशेष छिड़काव इसे और भी जायकेदार बनाता है।
वहीं, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में कांजी-वड़ा की एक रोचक परंपरा है। राई के पानी में डूबे हुए वड़े पाचन के लिए विशेष रूप से अच्छे माने जाते हैं। भारी पकवानों के बाद यह एक रोचक पाचक का कार्य करता है।
4. मालपुआ और पूरन पोली: क्षेत्रीय विशेषताएँ
होली के पकवानों में क्षेत्रीय विविधता भी बहुत रोचक है। उत्तर भारत में जहाँ मालपुए को चाशनी में डुबोकर एक विशेष मिठाई के रूप में परोसा जाता है, वहीं महाराष्ट्र में पूरन पोली बनाने की एक रोचक परंपरा है।
चने की दाल और गुड़ से भरी यह मीठी रोटी होली के अवसर पर एक विशेष नैवेद्य मानी जाती है। इन पकवानों की विविधता ही भारत को एक विशेष सांस्कृतिक पहचान देती है। हर प्रांत का अपना एक रोचक स्वाद है जो इस त्योहार को अनूठा बनाता है।
5. नमकपारे और शक्करपारे: चाय के साथ विशेष मेल
होली की सुबह जब मेहमान घर आते हैं, तो उनके स्वागत के लिए नमकपारे और शक्करपारे एक विशेष नाश्ते के रूप में पेश किए जाते हैं। इन्हें बनाना काफी रोचक होता है क्योंकि इन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। यह विशेष रूप से बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय होते हैं। कुरकुरे नमकपारे और मीठे शक्करपारे का यह रोचक द्वंद्व होली की थाली को पूर्ण बनाता है।
6. पकवानों के पीछे की रोचक सामाजिक परंपरा
होली पर पकवान केवल खाने के लिए नहीं होते, बल्कि इनका एक विशेष सामाजिक संदेश भी होता है। ‘होली मिलन’ के दौरान एक-दूसरे के घर जाकर इन विशेष व्यंजनों का आदान-प्रदान करना भाईचारे को बढ़ावा देने का एक रोचक तरीका है।
जब हम किसी को अपने हाथ से बनी गुझिया खिलाते हैं, तो वह केवल स्वाद नहीं, बल्कि एक विशेष सम्मान और प्रेम होता है। यह रोचक मेल-जोल ही समाज की कड़वाहट को मिटाकर उसमें रिश्तों के विशेष रंग भर देता है।
7. सेहत और स्वाद का विशेष संतुलन
आजकल के दौर में, लोग सेहत को लेकर विशेष रूप से जागरूक हैं। इसलिए, होली के पकवानों को बनाने के तरीके में भी कुछ रोचक बदलाव आए हैं। अब लोग ओवन में बेक की हुई गुझिया या कम चीनी वाले मालपुए बनाना विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। यह एक रोचक पहल है जिससे हम अपनी परंपराओं को आधुनिक स्वास्थ्य मानकों के साथ जोड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहें तो, होली के पकवान इस पर्व की आत्मा हैं। चाहे वह गुझिया की मिठास हो, ठंडाई का विशेष नशा हो, या दही-भल्लों का चटपटापन—हर व्यंजन एक रोचक कहानी कहता है। ये पकवान हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और उत्सव में एक विशेष उत्साह भर देते हैं।
इस होली, आप भी इन विशेष और रोचक व्यंजनों का आनंद लें और अपनों के साथ खुशियों के रंग बाँटें।




