A couple embracing warmly in a London park during autumn, expressing love and togetherness.

बड़ी उम्र की महिला और छोटा पार्टनर: जब प्यार में उम्र का फासला ‘टैबू’ बन जाए

हमारे समाज में एक पुरानी कहावत है— “प्यार अंधा होता है।” लेकिन हकीकत यह है कि समाज की आँखें तब सबसे ज़्यादा खुल जाती हैं जब वह एक ऐसी जोड़ी को देखता है जिसमें महिला की उम्र पुरुष से ज़्यादा हो। जैसे ही प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास या मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर की बात आती है, सोशल मीडिया ‘ट्रोल्स’ और ‘संस्कृति के रक्षकों’ से भर जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब एक 50 साल का पुरुष 25 साल की लड़की से शादी करता है, तो उसे ‘ग्लैमरस’ या ‘किस्मत वाला’ क्यों कहा जाता है?

आज RealShePowerHindi पर हम पर्दे के पीछे के उस सच को खंगालेंगे जिसे अक्सर लोग ‘टैबू’ कहकर दबा देते हैं।

1. दोहरे मापदंड: पुरुष के लिए ‘गर्व’, महिला के लिए ‘शर्म’ क्यों?

हज़ारों सालों से पितृसत्तात्मक समाज ने यह तय कर दिया है कि पुरुष को हमेशा ‘बड़ा’ और ‘रक्षक’ होना चाहिए। अगर पुरुष उम्र में बड़ा है, तो उसे अनुभव और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जैसे ही यह समीकरण उल्टा होता है, समाज असहज हो जाता है।

जब महिला बड़ी होती है, तो समाज उसे डॉमिनेटिंग‘ (Dominating) या पुरुष को ‘गुमराह’ समझने लगता है। सवाल यह है कि अगर दो बालिग इंसान आपसी सहमति और प्यार से साथ हैं, तो उम्र के फासले का सर्टिफिकेट समाज से लेने की ज़रूरत क्यों है?

2. ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ का डर और सामाजिक दबाव

बड़ी उम्र की महिलाओं को अक्सर यह कहकर डराया जाता है कि “तुम माँ कैसे बनोगी?” या “जब तुम बूढ़ी हो जाओगी, तो वह तुम्हें छोड़ देगा।”

हकीकत यह है कि रिश्ता केवल बच्चों के लिए या शारीरिक आकर्षण के लिए नहीं होता। एक रिश्ता सम्मान, मानसिक तालमेल और साथ के लिए होता है। आज की आधुनिक चिकित्सा और बदलती सोच ने इन रूढ़ियों को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया है, लेकिन मानसिक बेड़ियाँ अब भी मज़बूत हैं।

3. युवा पुरुष बड़ी उम्र की महिलाओं की तरफ क्यों आकर्षित होते हैं?

मनोविज्ञान (Psychology) के अनुसार, कई युवा पुरुष ऐसी महिलाओं को पसंद करते हैं जो:

  • भावनात्मक रूप से स्थिर हों (Emotionally Stable): बड़ी उम्र की महिलाएं छोटी लड़कियों की तुलना में ज़्यादा परिपक्व होती हैं।
  • आत्मनिर्भर हों (Independent): उन्हें छोटी-छोटी बातों के लिए किसी पर निर्भर रहने की आदत नहीं होती।
  • स्पष्ट संवाद (Clear Communication): वे जानती हैं कि उन्हें जीवन से क्या चाहिए, जिससे रिश्तों में ‘गेम्स’ कम और ‘गहराई’ ज़्यादा होती है।

4. क्या कहता है हमारा कानून और हकीकत?

भारत का कानून साफ़ कहता है कि दो बालिग व्यक्ति अपनी पसंद से किसी के भी साथ रह सकते हैं। लेकिन ‘सामाजिक कानून’ आज भी 18वीं सदी में जी रहा है। बड़ी उम्र की महिला और छोटे पार्टनर के रिश्तों में सबसे बड़ी चुनौती पार्टनर नहीं, बल्कि ‘पड़ोसी’ और ‘रिश्तेदार’ होते हैं।

इन रिश्तों में अक्सर महिला को ‘शिकारी’ (Predator) के रूप में देखा जाता है, जो पूरी तरह से गलत और अपमानजनक है।

5. इस ‘टैबू’ को कैसे तोड़ें?

अगर आप भी ऐसे किसी रिश्ते में हैं, तो ये बातें याद रखें:

  1. अपनी खुशी को प्राथमिकता दें: लोग दो दिन बात करेंगे और फिर किसी नए मुद्दे पर चले जाएंगे। आपकी ज़िंदगी आपकी है।
  2. कम्युनिकेशन स्ट्रॉन्ग रखें: अपने पार्टनर के साथ उम्र के अंतर को लेकर खुलकर बात करें ताकि भविष्य में कोई असुरक्षा (Insecurity) न हो।
  3. फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस: जब आप आर्थिक रूप से मज़बूत होती हैं, तो समाज की आवाज़ें अपने आप धीमी हो जाती हैं।

अवश्य पढ़ें

Quick De-Stress Tips in Hindi

त्वरित तनाव मुक्ति टिप्स (हिंदी)

व्यस्त जीवन में तनाव तुरंत कम करने के आसान और असरदार उपाय — त्वरित ध्यान, साँस-व्यायाम और मनोवैज्ञानिक तकनीकें जो तुरंत राहत देती हैं।

→ पूरा लेख पढ़ें

निष्कर्ष: प्यार का कोई कैलेंडर नहीं होता

प्यार दो रूहों का मिलन है, दो जन्मतिथियों (Date of Birth) का मिलान नहीं। अगर समाज ‘सुगर डैडी’ के कॉन्सेप्ट को स्वीकार कर सकता है, तो उसे एक सशक्त महिला और उसके युवा पार्टनर को भी स्वीकार करना होगा।

अब समय आ गया है कि हम उम्र के इस फासले को ‘टैबू’ की नज़रों से देखना बंद करें और इसे ‘पसंद की आज़ादी’ के रूप में देखें।

RealShePower Special Checklist for Readers:

  • क्या आपको लगता है कि समाज कभी इस अंतर को स्वीकार करेगा?
  • क्या आपने कभी ऐसी किसी जोड़ी को करीब से देखा है?
  • अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर साझा करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *