Close-up of a woman embracing her body during a workout in the gym. 2026 की 'वेट-लॉस क्रांति': 5 भारतीय कंपनियाँ जो ओज़ेम्पिक को सस्ता बनाएंगी

2026 की ‘वेट-लॉस क्रांति’: 5 भारतीय कंपनियाँ जो ओज़ेम्पिक को सस्ता बनाएंगी

यहाँ उन शीर्ष 5 भारतीय फार्मा दिग्गजों की सूची दी गई है जो 2026 तक भारत में सस्ती वेट-लॉस दवाएं लाने की दौड़ में सबसे आगे हैं:

1. सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज (Sun Pharma)

भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा पहले से ही अपनी खुद की एक नई दवा पर काम कर रही है, जो ओज़ेम्पिक की तरह काम करती है लेकिन इसकी कार्यक्षमता बेहतर होने का दावा किया जा रहा है।

  • स्टेटस: वे वर्तमान में इसके क्लीनिकल ट्रायल (परीक्षण) के चरणों में हैं। पेटेंट खत्म होते ही वे अपनी जेनेरिक सेमाग्लूटाइड लॉन्च करने के लिए सबसे पहले तैयार होंगे।

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2. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Labs)

डॉ. रेड्डीज ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वे वजन घटाने वाली दवाओं (GLP-1 agonists) के पोर्टफोलियो पर भारी निवेश कर रहे हैं।

  • रणनीति: कंपनी का लक्ष्य ओज़ेम्पिक के जेनेरिक वर्जन को न केवल भारत में, बल्कि उभरते हुए वैश्विक बाजारों में भी उतारना है। वे इसकी कीमत को वर्तमान बाजार मूल्य से 40-60% तक कम कर सकते हैं।

3. सिप्ला (Cipla)

सिप्ला हमेशा से सामान्य आदमी तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए जानी जाती है। कंपनी के CEO ने संकेत दिए हैं कि वे सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक वर्जन के लिए ‘पार्टनरशिप’ या ‘इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग’ के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

  • फोकस: इनका ध्यान मुख्य रूप से भारतीय रिटेल मार्केट पर होगा ताकि स्थानीय केमिस्ट शॉप पर यह दवा आसानी से उपलब्ध हो सके।

4. जाइडस लाइफसाइंसेस (Zydus Lifesciences)

जाइडस पहले ही भारत में अपनी खुद की डायबिटिक दवा ‘Lidoglitazar’ लॉन्च कर चुकी है। वे अब ओज़ेम्पिक के विकल्प के रूप में एक नई श्रेणी की दवा पर शोध कर रहे हैं जो मौखिक (गोली के रूप में) ली जा सकेगी।

  • खासियत: इनका जोर इंजेक्शन के बजाय सस्ती और प्रभावी गोलियों पर है, जो मध्यम वर्ग के लिए अधिक सुलभ होंगी।

5. ल्यूपिन (Lupin)

ल्यूपिन भी इस “बायोसिमिलर” (Bio-similar) रेस में शामिल है। कंपनी अपनी विनिर्माण इकाइयों (Manufacturing units) को सेमाग्लूटाइड के उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।

  • विस्तार: ल्यूपिन का लक्ष्य इसे टियर-2 और टियर-3 शहरों के अस्पतालों तक पहुंचाना है।

कीमत में कितना अंतर आएगा?

वर्तमान में, ओज़ेम्पिक या इसके समकक्ष दवाओं का खर्च ₹10,000 से ₹25,000 प्रति माह के बीच आता है। विशेषज्ञों और उद्योग के अनुमानों के अनुसार:

  • जेनेरिक कीमत: भारतीय कंपनियों के आने के बाद, यही इलाज ₹2,000 से ₹5,000 प्रति माह तक गिर सकता है।
  • उपलब्धता: डॉक्टर के पर्चे (Prescription) पर यह हर बड़े मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध होगी।

चेतावनी (Disclaimer):

भले ही ये दवाएं सस्ती हो जाएं, लेकिन ये बिना डॉक्टरी सलाह के कभी नहीं ली जानी चाहिए। यह दवा हार्मोनल संतुलन को बदलती है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी अनिवार्य है।

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