मकर संक्रांति 2026: कब है संक्रांति? जानें सही तिथि, पुण्यकाल मुहूर्त और दान का महत्व

मकर संक्रांति 2026: कब है संक्रांति? जानें सही तिथि, पुण्यकाल मुहूर्त और दान का महत्व

मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व भारतीय जनमानस में नई ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है। जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है। 2026 में सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ योगों में हो रहा है।

इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि 2026 में मकर संक्रांति की सही तारीख क्या है, स्नान-दान का शुभ समय कौन सा है और इस दिन खिचड़ी व तिल का क्या महत्व है।

1. मकर संक्रांति 2026: 14 जनवरी या 15 जनवरी?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार की रात को मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

  • संक्रांति क्षण: 14 जनवरी 2026 को रात 08:57 PM।
  • उदया तिथि का महत्व: शास्त्रानुसार, संक्रांति का स्नान और दान उदया तिथि में किया जाता है, इसलिए मुख्य पर्व 14 जनवरी 2026 को ही मनाया जाएगा। हालांकि, कुछ स्थानों पर पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह भी मान्य हो सकता है।

2. शुभ मुहूर्त और पुण्यकाल (Auspicious Timings)

मकर संक्रांति पर पुण्यकाल और महापुण्यकाल में किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

  • मकर संक्रांति पुण्यकाल: सुबह 07:15 AM से शाम 05:45 PM तक।
  • महापुण्यकाल मुहूर्त: सुबह 07:15 AM से 09:00 AM तक (स्नान और विशेष दान के लिए सर्वश्रेष्ठ)।

3. मकर संक्रांति का महत्व: क्यों मनाई जाती है?

धार्मिक पक्ष: इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं। यह पिता-पुत्र के मिलाप का पर्व है। इसी दिन भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी।

वैज्ञानिक पक्ष: मकर संक्रांति से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। यह शीत ऋतु के समाप्त होने और वसंत के आगमन का संकेत है। तिल और गुड़ का सेवन शरीर को ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करता है।

4. राशि अनुसार दान (Donation According to Zodiac)

मकर संक्रांति पर इन वस्तुओं का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं:

  • मेष और वृश्चिक: गुड़ और लाल मसूर की दाल।
  • वृषभ और तुला: सफेद तिल और चीनी।
  • मिथुन और कन्या: मूंग की दाल और हरी सब्जियां।
  • कर्क: चावल और दूध।
  • सिंह: गेहूं और तांबा।
  • धनु और मीन: चने की दाल और हल्दी।
  • मकर और कुंभ: काला तिल, कंबल और लोहा।

5. मकर संक्रांति 2026 पूजा विधि

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर गंगाजल डालकर स्नान करें।
  2. तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  3. ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
  4. खिचड़ी का भोग लगाएं और गरीबों को गर्म वस्त्र व अन्न दान करें।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: 2026 में मकर संक्रांति कब है?

उत्तर: 14 जनवरी 2026, बुधवार।

प्रश्न 2: मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाई जाती है?

उत्तर: खिचड़ी का संबंध शनि (दाल), चंद्रमा (चावल), सूर्य (हल्दी) और बुध (हरी सब्जियां) से है। इसे खाने से सभी ग्रह संतुलित होते हैं।

प्रश्न 3: क्या मकर संक्रांति पर गंगा स्नान जरूरी है?

उत्तर: यदि गंगा जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करना समान फल देता है।

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